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शुक्रवार, 3 अप्रैल 2009

हास्य क्षणिकाएँ

रमेश मनोहरा,जावरा, रतलाम

अहसान

नेता का पहला नारा है

हमें वोट दीजिये

फिर आप

हमसे काम लीजिये।

हमने उनको वोट दिया

बदले में इस तरह

काम का अहसान jataya,

अब वे बकरे की तरह

हलाल कर खाते हैं

पूरे पाँच साल तक

ईद मनाते हैं.
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चुनाव
इस बार वे

फिर चुनाव जीत गए।

यानि कि

बेरोजगार होते-होते

बच गए.
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दुम
कुत्तों से अधिक दुम

वे लोग हिलाते हैं

जो मंत्री जी के

खास चमचे

कहलाते हैं.
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अस्तबल
इन दिनों राजनीती

बन गयी है अस्तबल

जहाँ कुछ

चुने हुए घोडे आते हैं

और हरी-हरी घास

चरकर सो जाते हैं.
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भिखारी

भीख दोनों ही मांगते हैं

इसलिए दोनों ही

भिखारी कहलाते हैं।

फर्क दोनों में इतना है

पहला रोजाना माँगकर खाता है

दूसरा पाँच साल में

एक बार माँगने आता है.
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