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रविवार, 12 फरवरी 2012

सामयिक अवधी कविता: अबकी चुनाव हम लड़ि जाबै --ॐ प्रकाश तिवारी

सामयिक अवधी कविता

अबकी चुनाव हम लड़ि जाबै

ॐ प्रकाश तिवारी 
*
तुम्हरै सपोर्ट चाही ददुआ
अबकी चुनाव हम लड़ि जाबै । 

कीन्हेंन बहुतेरे कै प्रचार,
जय बोलेन सबकी धुआँधार,
दुइ पूड़ी के अहसान तले
सगरौ दिन कीन्हेंन हम बेगार । 
जब तलक नाँहिं परि गवा वोट
नेकुना से घिसि डारिन दुआर,
अब जीति गए तो ई ससुरै
चीन्हत नाँहीं चेहरा हमार । 

अबकी इनहिन सबके खिलाफ
हम टिकस की खातिर अड़ि जाबै । 
तुम्हरै सपोर्ट चाही ------------

छपुवाउब बड़े-बड़े पर्चा,
करबै पुरहर खर्चा-बर्चा,
ददुआ तनिकौ कमजोर परब
तौ माँगब तुमहूँ से कर्जा । 
चहुँ दिशि होई हमरी चर्चा,
पउबै हम नेता कै दर्जा,
लोगै हमका द्याखै खातिर
करिहैं दस काम्यौं कै हर्जा ।

अबकी दिल्ली दरबार मा हम
अपनिउ एक चौकी धरि द्याबै । 
तुम्हरै सपोर्ट चाही ----------

मूंठा राखब आपन निसान,
पटकब बिपक्ष कै पकरि कान,
करवाय लेब कप्चरिंग बूथ,
बँटवाय देब सतुआ-पिसान । 
अबहीं तक छोलेन घाँस बहुत,
अब राजनीति में भै रुझान,
तौ जीति के ददुआ दम लेबै,
मन ही मन मा हम लिहन ठान । 

धोबी का वोट मिलै खातिर
गदहौ के पाँयन परि जाबै । 
तुम्हरै सपोर्ट चाही ---------

जब पहिर के निकरब संसद मां
हम उज्जर कुर्ता खादी कै,
चेहरा जाए झुराय ददुआ,
नेतन की कुल आबादी कै । 
अबकिन चुनाव मा नापि लिअब
जलवा इन सब की आँधी कै,
एक दिन मा लै लेबै हिसाब 
हम भारत की बरबादी कै । 

संसद मां प्रश्न उठावै कै
हम एक्कौ पैसा न ल्याबै । 
तुम्हरै सपोर्ट चाही ---------

है याक अर्ज तुम सब जन से,
अबकी बिजयी करिहौ मूठा,
जैसन जीतब ददुआ तुमका
दिलवैबै शक्कर कै कोटा । 
आलू-पियाज अफरात रहे,
ना परै देब तनिकौ टोटा,
तुम सबका सैंक्सन करवइबै
जहता कै थरिया औ लोटा । 

विश्वास करौ हम संसद में
एक टका दलाली न खाबै ।
तुम्हरै सपोर्ट चाही ------

- ओमप्रकाश तिवारी

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