शुक्रवार, 5 अक्तूबर 2012

पितृ तर्पण विधि pitru tarpan vidhi

पितृ तर्पण विधि:



तर्पण मन्त्र TARPAN MANTRAS
आवाहन Awahan: दोनों हाथों की अनामिका (छोटी तथा बड़ी उँगलियों के बीच की उंगली) में कुश (एक प्रकार की घास) की पवित्री (उंगली में लपेटकर दोनों सिरे ऐंठकर अंगूठी की तरह छल्ला) पहनकर, बाएं कंधे पर सफेद वस्त्र डालकर  दोनों हाथ जोड़कर अपने पूर्वजों को निम्न मन्त्र से आमंत्रित करें 
 First wear pavitree (ring of kushaa- e typa of grass) in ring fingers of both the hands and place a whitk cloth piece on right shoulder. Now invite (call) your ancestor’s spirit by praying (fold your hand) through this mantra:

'ॐ आगच्छन्तु मे पितर एवं ग्रहन्तु जलान्जलिम'  
ॐ हे पितरों! पधारिये तथा जलांजलि ग्रहण कीजिए। 
“Om Aagachchantu Me Pitar Emam Grihanantu Jalaanjalim.”

तर्पण: जल अर्पित करें Tarpan (offer Water)

निम्न में से प्रत्येक को 3 बार किसी पवित्र नदी, तालाब, झील या अन्य स्रोत (गंगा / नर्मदा जल पवित्रतम माने गए हैं) के शुद्ध जल में थोडा सा दूध, तिल तथा जावा मिला कर जलांजलि अर्पित करें। 
 Now offer water taken from any natural source river, tank, lake etc.( Ganga / narmada Jal considered most pious) mixed with little milk, java & Til r : 3 times for each one

पिता हेतु  For Father: 
(गोत्र नाम) गोत्रे अस्मतपिता पिता का नाम शर्मा वसुरूपस्त्तृप्यतमिदं तिलोदकम (गंगा/नर्मदा जलं वा) तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।
 ........... गोत्र के मेरे पिता श्री वसुरूप में तिल तथा पवित्र जल ग्रहण कर तृप्त हों। तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।
“gotra name  Gotrah Asmat (mine) Pita () father name of father  Sharma Vasuroopastripyatamidam Tilodakam (GangaJalam Vaa) Tasmey Swadha Namah, Tasmey Swadha Namah, Tasmey Swadha Namah.”

Tilodakam: Use water mixed with milk java & Til ( water taken fromGanga / narmada rivers cosidered best) Tasmey Swadha Namah recite 3 times while leaving (offering) water from hand
pitamah (dada / babba) hetu To Grand Father:
उक्त में अस्मत्पिता के स्थान पर अस्मत्पितामह पढ़ें  Replace AsmatPita with Asmatpitamah
वसुरूपस्त्तृप्यतमिदं के स्थान पर रूद्ररूपस्त्तृप्यतमिदं पढ़ें Replace Vasuroopastripyatamidam with Rudraroopastripyatamidam

पिता के नाम के स्थान पर पितामां का नाम लें Replace Father’s Sharma with Grand Father’s Name
माता हेतु  तर्पण Tarpan to Mother

(गोत्र नाम) गोत्रे अस्मन्माता माता का नाम देवी वसुरूपास्त्तृप्यतमिदं तिलोदकम (गंगा/नर्मदा जलं वा) तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।
 ........... गोत्र की मेरी माता श्रीमती ....... देवी वसुरूप में तिल तथा पवित्र जल ग्रहण कर तृप्त हों। तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।“AmukGotraa Asmnamata AmukiDevi Vasuroopaa Tripyatamidam Tilodakam Tasmey Swadha Namah, Tasmey Swadha Namah, Tasmey Swadha Namah.”

निस्संदेह मन्त्र श्रद्धा अभिव्यक्ति का श्रेष्ठ माध्यम हैं किन्तु भावना, सम्मान तथा अनुभूति अन्यतम हैं। It is true that mantra is a great medium for pray and offerings.
But love, attachment, feelings, sentiments, emotions, regards, Bhawana is a prime not mantras.

पितृ विसर्जन दिवस: आश्विन पितृ पक्ष अमावस्या सोमवार 15 अक्टूबर 2012 
Pitra Visarjan day:Ashwin Pitra Paksha Amvasya: Mon, 15 Oct 2012

जलांजलि पूर्व दिशा में 16 बार, उत्तर दिशा में 7 बार तथा दक्षिण दिशा में 14 बार अर्पित करें 
offer jalanjali (take tilodikam in both hands joined and leave graduaalee on earth or in some vassel) 16 times in east, 7 times in north & 14 times in south. 
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संक्षिप्त पितृ तर्पण विधि:
 पितरोंका तर्पण करनेके पूर्व इस मन्त्र से हाथ जोडकर प्रथम उनका आवाहन करे -
ॐ आगच्छन्तु मे पितर इमं गृह्णन्तु जलान्जलिम ।

अब तिलके साथ तीन-तीन जलान्जलियां दें -
(पिता के लिये)
अमुकगोत्रः अस्मत्पिता अमुक (नाम) शर्मा वसुरूपस्तृप्यतामिदं तिलोदकं (गंगाजलं वा) तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः ।
(माता के लिये)
अमुकगोत्रा अस्मन्माता अमुकी (नाम) देवी वसुरूपा तृप्यतामिदं तिलोदकं तस्यै स्वधा नमः, तस्यै स्वधा नमः, तस्यै स्वधा नमः ।
जलांजलि पूर्व दिशा में 16 बार, उत्तर दिशा में 7 बार तथा दक्षिण दिशा में 14 बार अर्पित करें 
offer jalanjali (take tilodikam in both hands joined and leave graduaalee on earth or in some vassel) 16 times in east, 7 times in north & 14 times in south.

3 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

good information provided useful for the person like me who want to perform the pitru tarpan but dont know the vidhi we are greatful to you

बेनामी ने कहा…

really very good info as pandits are not aviliable these days for the same purpose and people like us feel help less... can you name the book i heard published by some gitapress having all pitra rituals

बेनामी ने कहा…

KYA YE TARPAN KISI MANDIR ME KIYA JA SAKTA HAI ?
YAHA MERE SHAHAR ME YE VIDHI EK MANDIR ME KI JA RAHI HAI JAHA KOI JALASHAY NAHI HAI TO ESA KAR KE KYA WO MANDIR KO DUSHIT AUR APAVITR KAR RAHE HAI ?