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सोमवार, 18 नवंबर 2013

chhand salila: vani chhand -sanjiv

छंद सलिला:
वाणी छंद
संजीव
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रचना विधान
द्विपदिक, चतुश्चरणी, मात्रिक, ४४ वर्ण, ७१ मात्राएँ
पहला, तीसरा, चौथा चरण
इंद्रा वज्रा, दूसरा चरण उपेन्द्र वज्रा
१, ३, ४ चरण: तगण तगण जगण २ गुरु / २ चरण: जगण तगण जगण २ गुरु
१, ३, ४: २२१-२२१-१२१-२२ २: १२१-२२१-१२१-२२
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उदाहरण:
१. बोलो न बोलो सुन लो विधाता / अनामनामी वरदानदाता
   मोड़ो न तोड़ो वर दो प्रदाता / जोड़ें न- छोड़ें वह जो सुहाता

२. लोकोपयोगी परियोजनाएँ / विकासवाही सुविकास लायें
   रोकें अँधेरे फिर रौशनी दें / बाधा हटायें पग भी बढ़ायें

३. छोडो न पर्दा प्रिय! लाज क्यों है? / मुझे न रोको अब पास आओ
   रोके न टोके हमको जमाना / बाँहें न छोडो दिल में समाओ

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1 टिप्पणी:

Apil Bhardwaj ने कहा…

Apil Bhardwaj

waaaaaah