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शनिवार, 18 जनवरी 2014

chhand salila: sujan chhand -sanjiv

छंद सलिला:
सुजान छंद
संजीव
*
द्विपदीय मात्रिक सुजान छंद में चौदह तथा नौ मात्राओं पर यति तथा पदांत में गुरु-लघु का विधान होता है.

चौदह-नौ यति रख रचें, कविगण छंद सुजान
हो पदांत लघु-गुरु 'सलिल', रचना रस की खान

उदाहरण :

१. चौदह-नौ पर यति सुजान / में'सलिल'-प्रवाह
   गुरु-लघु से पद-अंत करे, कवि पाये वाह

२. डर न मुझको किसी का भी / है दयालु ईश
   देश-हित हँसकर 'सलिल' कर / अर्पित निज शीश

३. कोयल कूके बागों में / पनघट पर शोर
   मोर नचे अमराई में / खेतों में भोर

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