स्तम्भ menu

Drop Down MenusCSS Drop Down MenuPure CSS Dropdown Menu

गुरुवार, 13 फ़रवरी 2014

chhand salila: siddhi chhand -sanjiv

​​छंद सलिला:
सिद्धि छंद
 
संजीव  
*
       दो पदी, चार चरणीय, ४४ वर्णों, ६९ मात्राओं के मात्रिक सिद्धि छंद में प्रथम चरण इन्द्रवज्रा (तगण तगण जगण २ गुरु) तथा द्वितीय, तृतीय व चतुर्थ चरण उपेन्द्रवज्रा (जगण तगण जगण २ गुरु) छंद के होते हैं.
उदाहरण:
१. आना, न जाना मन में समाना, बना बहाना नज़रें मिलाना
   सुना तराना नज़दीक आना, बना बहाना नयना चुराना 

२. ऊषा लजाये खुद को भुलाये, उठा करों में रवि चूम भागा                               हुए गुलाबी कह गाल क्यों हैं?, करे ठिठोली रतनार मेघा 

३. आकाशचारी उड़ता अकेला, भरे उड़ानें नभ में हमेशा
    न पिंजरे में रहना सुहाता, हरा चना भी उसको न भाता
*
(अब तक प्रस्तुत छंद: अग्र, अचल, अचल धृति, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उपेन्द्रवज्रा, एकावली, कीर्ति, घनाक्षरी, छवि, जाया, ​ तांडव, तोमर, दीप, दोधक, निधि, प्रेमा, बाला, मधुभार, माया, माला, ऋद्धि, रामा, लीला, वाणी, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शिव, शुभगति, सार, सिद्धि, सुगति, सुजान, हंसी)
*********

कोई टिप्पणी नहीं: