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गुरुवार, 6 मार्च 2014

chhand salila: ahir chhand -sanjiv

छंद सलिला:
अहीर छंद
संजीव 
* लक्षण: जाति रौद्र, पद २, चरण ४, प्रति चरण मात्रा ११, चरणान्त लघु गुरु लघु (जगण)

लक्षण छंद:

चाहे रांझ अहीर, बाला पाये हीर 

लघु गुरु लघु चरणांत, संग रहे हो शांत  
पूजें ग्यारह रूद्र, कोशिश लँघे समुद्र 
जल-थल-नभ में घूम, लक्ष्य सके पद चूम
उदाहरण:
१. सुर नर संत फ़क़ीर, कहें न कौन अहीर?
   आत्म-ग्वाल तज धेनु, मन प्रयास हो वेणु 
   प्रकृति-पुरुष सम संग, रचे सृष्टि कर दंग
   ग्यारह हों जब एक, मानो जगा विवेक      

२. करो संग मिल काम, तब ही होगा नाम
    भले विधाता वाम, रखना साहस थाम
    सुबह दोपहर शाम, रचना छंद ललाम
    कर्म करें निष्काम, सहज गहें परिणाम
    
३. पूजें ग्यारह रूद्र, मन में रखकर भक्ति 
    जनगण-शक्ति समुद्र, दे अनंत अनुरक्ति
    लघु-गुरु-लघु रह शांत, रच दें छंद अहीर
    रखता ऊंचा मअ खाली हाथ फ़क़ीर

(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, ककुभ, कीर्ति, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, छवि, जाया, तांडव, तोमर, दीप, दोधक, नित, निधि, प्रदोष, प्रेमा, बाला, मधुभार, मनहरण घनाक्षरी, माया, माला, ऋद्धि, रामा, लीला, वाणी, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शिव, शुभगति, सार, सिद्धि, सुगति, सुजान, हंसी) 
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