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शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014

chhand salila: chandrayan chhand -sanjiv

छंद सलिला:
चंद्रायण छंद
संजीव
*
छंद-लक्षण: जाति त्रैलोक लोक , प्रति चरण मात्रा २१ मात्रा, चरणांत गुरु लघु गुरु (रगण), ६ वीं से १० वीं मात्रा रगण, ८ वीं से ११ वीं मात्रा जगण, यति ११-१०।

लक्षण छंद:

मंजुतिलका छंद रचिए हों न भ्रांत
बीस मात्री हर चरण हो दिव्यकांत
जगण से चरणान्त कर रच 'सलिल' छंद
सत्य ही द्युतिमान होता है न मंद
लक्ष्य पाता विराट

उदाहरण:
१. अनवरत राम राम, भक्तजन बोलते
   जो जपें श्याम श्याम, प्राण-रस घोलते
   एक हैं राम-श्याम, मतिमान मानते
   भक्तगण मोह छोड़, कर्तव्य जानते

२. सत्य ही बोल यार!, झूठ मत बोलना 
    सोच ले मोह पाल, पाप मत ओढ़ना
    धर्म है त्याग राग, वासना जीतना 
    पालना द्वेष को न, क्रोध को छोड़ना
   
३. आपका वंश-नाम!, है न कुछ आपका
    मीत-प्रीत काम-धाम, था न कल आपका
    आप हैं अंश ईश, के इसे जान लें   
    ज़िंदगी देन देव, से मिली मान लें
   
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(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अरुण, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, ककुभ, कज्जल, कामिनीमोहन कीर्ति, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जाया, तांडव, तोमर, दीप, दीपकी, दोधक, नित, निधि, प्रतिभा, प्रदोष, प्रेमा, बाला, भव, मंजुतिलका, मदनअवतार, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, योग, ऋद्धि, राजीव, रामा, लीला, वाणी, विशेषिका, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, सरस, सार, सिद्धि, सुगति, सुजान, हेमंत, हंसगति, हंसी)
Sanjiv verma 'Salil'
salil.sanjiv@gmail.com
http://divyanarmada.blogspot.in

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