स्तम्भ menu

Drop Down MenusCSS Drop Down MenuPure CSS Dropdown Menu

रविवार, 20 अप्रैल 2014

chhand salila: - sanjiv


छंद सलिला:
शास्त्र छंद
संजीव
*
छंद-लक्षण: जाति महादैशिक , प्रति चरण मात्रा २० मात्रा, चरणांत गुरु लघु (तगण, जगण)


लक्षण छंद:
पढ़ो उठकर शास्त्र समझ-गुन कर याद 
रचो सुमधुर छंद याद रख मर्याद
कला बीसी रखें हर चरण पर्यन्त
हर चरण में कन्त रहे गुरु लघु अंत
उदाहरण:
१. शेष जब तक श्वास नहीं तजना आस
   लक्ष्य लाये पास लगातार प्रयास 
   शूल हो या फूल पड़े सब पर धूल
   सम न हो समय प्रतिकूल या अनुकूल
  
२. किया है सच सचाई को ही प्रणाम
    हुआ है सच भलाई  का ही सुनाम
    रहा है समय का ईश्वर भी गुलाम   
    हुआ बदनाम फिर भी मिला है नाम 

३. निर्भय होकर वन्देमातरम बोल 
    जियो ना पीटो लोकतंत्र का ढोल
    कर मतदान, ना करना रे मत-दान
    करो पराजित दल- नेता बेइमान
 *********************************************
विशेष टिप्पणी : 
हिंदी के 'शास्त्र' छंद से उर्दू के छंद 'बहरे-हज़ज़' (मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन) की मुफ़र्रद बह्र 'मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईल' की समानता देखिये. 
उदाहरण: 
१. हुए जिसके लिए बर्बाद अफ़सोस 
   वो करता भी नहीं अब याद अफ़सोस
२. फलक हर रोज लाता है नया रूप 
    बदलता है ये क्या-क्या बहुरूपिया रूप
३. उन्हें खुद अपनी यकताई पे है नाज़
    ये हुस्ने-ज़न है सूरत-आफ़रीं से
(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, ककुभ, कज्जल, कामिनीमोहन कीर्ति, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, छवि, जाया, तांडव, तोमर, दीप, दोधक, नित, निधि, प्रतिभा, प्रदोष, प्रेमा, बाला, भव, मदनअवतार, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, योग, ऋद्धि, राजीव, रामा, लीला, वाणी, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, सरस, सार, सिद्धि, सुगति, सुजान, हंसगति, हंसी)
Sanjiv verma 'Salil'
salil.sanjiv@gmail.com
http://divyanarmada.blogspot.in

कोई टिप्पणी नहीं: