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गुरुवार, 17 अप्रैल 2014

kshanikayen: poornima barman

चित्र-चित्र क्षणिका :
पूर्णिमा बर्मन

पूर्णिमा जी समकालिक हस्ताक्षरों में महत्वपूर्ण स्थान की अधिकारिणी हैं अपने रचना कर्म और हिंदी प्रसार दोनों के लिए. उनके पृष्ठ से साभार प्रस्तुत हैं कुछ क्षणिकाएँ>
फ़ोटो: इस अकेली शाम का
मतलब न पूछो
सर्द मौसम
और फैला दूर तक
एकांत सागर
एक पुल
थामे हुए हमको हमेशा -पूर्णिमा वर्मन

इस अकेली शाम का
मतलब न पूछो
सर्द मौसम
और फैला दूर तक
एकांत सागर
एक पुल
थामे हुए हमको हमेशा 

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फ़ोटो: बदला मौसम गर्म हवाएँ
फागुन बीता जाए
दोपहरी की 
सुस्ती हल्की
बार बार दुलराए -पूर्णिमा वर्मन
बदला मौसम गर्म हवाएँ
फागुन बीता जाए
दोपहरी की
सुस्ती हल्की
बार बार दुलराए 
*
फ़ोटो: फिर वही वेवक्त बारिश
रात गहरी
नम फुहारें
भीगती सड़कें
हवा के सर्द झोंके
रुकें...
रुक रुक के पुकारें - पूर्णिमा वर्मन
फिर वही वेवक्त बारिश
रात गहरी
नम फुहारें
भीगती सड़कें
हवा के सर्द झोंके
रुकें...
रुक रुक के पुकारें - 
*
फ़ोटो: खिड़कियों के पार 
उजला फागुनी मौसम
गर्म दोपहरी 
नींद का झोंका 
गुनगुना की-बोर्ड, 
फिर से
काम की चोरी -पूर्णिमा वर्मन
खिड़कियों के पार
उजला फागुनी मौसम
गर्म दोपहरी
नींद का झोंका
गुनगुना की-बोर्ड,
फिर से
काम की चोरी 
*
फ़ोटो: दौड़ना हर रोज 
नंगे पाँव सागर के किनारे
आसमानों से गुजरना
पानियों पर नजर रखना
एक पूरा जनम जैसे
रोज जीना -पूर्णिमा वर्मन
दौड़ना हर रोज
नंगे पाँव सागर के किनारे
आसमानों से गुजरना
पानियों पर नजर रखना
एक पूरा जनम जैसे
रोज जीना 

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