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शनिवार, 3 मई 2014

chhand salila: rasamrit chhand -sanjiv

​ॐ
छंद सलिला: 
रसामृत छंद
संजीव
*
छंद-लक्षण: जाति महारौद्र , प्रति चरण मात्रा २२ मात्रा, यति १६ - ६, चरणान्त गुरु लघु (तगण, जगण) ।
लक्षण छंद:
   काव्य रसामृत का करिए / नित विहँस पान
   ईश - देश महिमा का करिए / सतत गान
   सोलह कला छहों रस गुरु लघु / चरण अंत 
   सत-शिव-सुन्दर, सत-चित-आनंद / तज न संत                                                                                                                        
उदाहरण:
१.  राजनीति ने लोकनीति का / किया त्याग 
    लूटें नेता, लुटे न जनता / कहे भाग
    शोषक अफसर पत्रकार ले / रहे घूस
   
पूँजीपति डॉक्टर अधिवक्ता / हुए मूस 
    जाग कृषक - मजदूर मिटा दे / अनय जाग 
    देशभक्ति का छेड़े जनगण / पुण्य राग 

२. हुआ महाभारत भारत में / सीख पाठ
    शासक शासित की दम पर मत / करे ठाठ
    जाग गयी जनता तो देगी / लगा आग  
    फूँक देश को नेता खेलें / अब न फाग
    धन विदेश में ले जाकर जो / रहे जोड़
    उनका मुँह काला करने की / मचे होड़
    भाषा भूषा धर्म जोड़ते, देँ न फ़ूड
    लसलिल; देश-हिट खातिर दें मत/भेद छोङ
   
 
३. महाराष्ट्र में राष्ट्रवाद क्यों / रहा हार?
    गैर मैराथन को लगता है / क्यों बिहार?
    काश्मीर का दर्ज़ा क्यों है / हुआ खास?
    राजनीती के स्वार्थ गले की / बने फाँस
    राष्ट्रीय सरकार बने दल / मिटें आज
    संसद में हुड़दंग न हो कुछ / करो लाज 

    असम विषम हो रहा रोक लो / बढ़ा हाथ
    आतंकी बल जो- दें उनका / झुका माथ 
    देशप्रेम की राह चलें हम / उठा शीश 
    दे पाये निज प्राण देश-हित / 'सलिल' ईश
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(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अरुण, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामिनीमोहन, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दीप, दीपकी, दोधक, नित, निधि, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, योग, ऋद्धि, रसामृत, राजीव, राधिका, रामा, लीला, वाणी, विशेषिका, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, सरस, सार, सिद्धि, सुगति, सुजान, हेमंत, हंसगति, हंसी)

।। हिंदी आटा माढ़िये, उर्दू मोयन डाल । 'सलिल' संस्कृत सान दे, पूरी बने कमाल ।।
।। जन्म ब्याह राखी तिलक, गृह प्रवेश त्यौहार । हर अवसर पर दे 'सलिल', पुस्तक ही उपहार ।।
।। नीर बचा, पौधे लगा, मित्र घटायें शोर । कचरे का उपयोग कर उजली करिए भोर ।। 

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