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रविवार, 11 मई 2014

chhand salila: sujan / virhani chhand -sanjiv


छंद सलिला:   ​​​

सुजान / विरहणी छंद ​

संजीव
*
छंद-लक्षण: जाति रौद्राक, प्रति चरण मात्रा २३ मात्रा, यति १४-९, चरणांत गुरु लघु (तगण, जगण)

लक्षण छंद:
   बनिए सुजान नित्य तान / छंद का वितान
   रखिए भुवन-निधि अंत में / गुरु-लघु पहचान
   तजिए न आन रीति जान / कर्म कर महान
   करिए निदान मीत ठान / हो नया विहान 
   
उदाहरण:

१.  प्रभु चित्रगुप्त निराकार / होते साकार
    कण-कण में आत्म रूप हैं, देव निराकार 

    अक्षर अनादि शब्द ब्रम्ह / सृजें काव्य धार
    कथ्य लय ऱस बिम्ब सोहें / सजे अलंकार
 
२. राम नाम ही जगाधार / शेष सब असार
    श्याम नाम ही जप पुकार / बाँट 'सलिल' प्यार 

    पुरुषार्थ-भाग्य नीति सुमति / भवसागर पार
    करे-तरे ध्यान धरें हँस / बाँके करतार 
 
३. समय गँवा मत, काम बिना / सार सिर्फ काम 
    बिना काम सुख-चैन छिना / लक्ष्य एक काम
    काम कर निष्काम तब ही / मिल पाये नाम
    ज्यों की त्यों चादर धर जा / ईश्वर के धाम 

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(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अरुण, अवतार, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपमान, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामिनीमोहन, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जग, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दीप, दीपकी, दोधक, दृढ़पद, नित, निधि, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, योग, ऋद्धि, रसामृत, राजीव, राधिका, रामा, लीला, वाणी, विरहणी, विशेषिका, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, सरस, सार, सिद्धि, सुगति, सुजान, संपदा, हरि, हेमंत, हंसगति, हंसी) 

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