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मंगलवार, 13 मई 2014

chhand salila: sukhda chhand -sanjiv


छंद सलिला:   ​​​

सुखदा छंद ​

संजीव
*
छंद-लक्षण: जाति महारौद्र, प्रति चरण मात्रा २२ मात्रा, यति १२-१०, चरणांत गुरु  (यगण, मगण, रगण, सगण)

लक्षण छंद:
   सुखदा बारह-दस यति, मन की बात कहे
   गुरु से करें पद-अंत, मंज़िल निकट रहे
     
उदाहरण:

१. 
नेता भ्रष्ट हुए जो / उनको धुनना है
    जनसेवक जो सच्चे / उनको सुनना है
    सोच-समझ जनप्रतिनिधि, हमको चुनना है
    शुभ भविष्य के सपने, उज्ज्वल बुनना है
    
 
२. कदम-कदम बढ़ना है / मंज़िल पग चूमे
    मिल सीढ़ी चढ़ना है, मन हँसकर झूमे
    कभी नहीं डरना है / मिल मुश्किल जीतें
    छंद-कलश छलकें / 'सलिल' नहीं रीतें
 
३. राजनीति सुना रही / स्वार्थ क राग है 
    देश को झुलसा रही, द्वेष की आग है
    नेतागण मतलब की , रोटियाँ सेंकते
    जनता का पीड़ा-दुःख / दल नहीं देखता
                   *********

(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अरुण, अवतार, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपमान, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामिनीमोहन, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जग, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दीप, दीपकी, दोधक, दृढ़पद, नित, निधि, निश्चल, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, योग, ऋद्धि, रसामृत, राजीव, राधिका, रामा, लीला, वाणी, विरहणी, विशेषिका, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, सरस, सार, सिद्धि, सुखदा, सुगति, सुजान, संपदा, हरि, हेमंत, हंसगति, हंसी)

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