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रविवार, 15 जून 2014

chhand salila: dhara chhand -sanjiv

छंद सलिला:
धाराRoseछंद 

संजीव
*
छंद लक्षण:  जाति महायौगिक, प्रति पद २९  मात्रा, यति १५ - १४, विषम चरणांत गुरु लघु सम चरणांत गुरु। 

लक्षण छंद:

    दे आनंद, न जिसका अंत , छंदों की अमृत धारा 
    रचें-पढ़ें, सुन-गुन सानंद , सुख पाया जब उच्चारा 
    पंद्रह-चौदह कला रखें, रेवा-धारा सदृश बहे
    गुरु-लघु विषम चरण अंत, गुरु सम चरण सुअंत रहे  

उदाहरण:

१. पूज्य पिता को करूँ प्रणाम , भाग्य जगा आशीष मिला           
    तुम बिन सूने सुबहो-शाम , 'सलिल' न मन का कमल खिला        
    रहा शीश पर जब तक हाथ , ईश-कृपा ने सतत छुआ 
    छाँह गयी जब छूटा साथ , तत्क्षण ही कंगाल हुआ
     
२. सघन तिमिर हो शीघ्र निशांत , प्राची पर लालिमा खिले   
    सूरज लेकर आये उजास , श्वास-श्वास को आस मिले            
    हो प्रयास के अधरों हास , तन के लगे सुवास गले  
    पल में मिट जाए संत्रास , मन राधा को रास मिले  

३. सतत प्रवाहित हो रस-धार, दस दिश प्यार अपार रहे              
    आओ! कर सोलह सिंगार , तुम पर जान निसार रहे 
    मिली जीत दिल हमको हार ,  हार ह्रदय तुम जीत गये 
    बाँटो तो बढ़ता है प्यार , जोड़-जोड़ हम रीत गये  
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(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अनुगीत, अरुण, अवतार, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपमान, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामरूप, कामिनीमोहन, काव्य, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गीता, गीतिका, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जग, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दिक्पाल, दीप, दीपकी, दोधक, दृढ़पद, धारा, नित, निधि, निश्चल, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मदनाग, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, मृदुगति, योग, ऋद्धि, रसामृत, रसाल, राजीव, राधिका, रामा, रूपमाला, रोला, लीला, वस्तुवदनक, वाणी, विद्या, विधाता, विरहणी, विशेषिका, विष्णुपद, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, शोभन, शुद्धगा, शंकर, सरस, सार, सारस, सिद्धि, सिंहिका, सुखदा, सुगति, सुजान, सुमित्र, संपदा, हरि, हरिगीतिका, हेमंत, हंसगति, हंसी)

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