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बुधवार, 18 जून 2014

punya smaran:

पुण्य स्मरण:



रानी लक्ष्मीबाई झाँसी बलिदान दिवस
प्रथम स्वातंत्र्य समर में वीरता, पराक्रम और बलिदान की अमरगाथा बनने वाली रानी को अशेष प्रणाम।
 

उपन्यास सम्राट : देवकीनंदन खत्री
 जन्म:18 जून, 1861, हिंदी के प्रथम तिलिस्मी लेखक। उपन्यास: चंद्रकांता, चंद्रकांता संतति, काजर की कोठरी, नरेंद्र-मोहिनी, कुसुम कुमारी, वीरेंद्र वीर, गुप्त गोदना, कटोरा भर, भूतनाथ। भूतनाथ को  उनके पुत्र दुर्गाप्रसाद खत्री ने पूरा किया।
 उपन्यासों से अधिक कीर्ति और यश पाने वाले खत्री जी ने 1898 में निजी ‘लहरी प्रेस’ की स्थापना की। उपन्यासों में ऐय्यारों और पात्रों के नाम अपनी मित्रमंडली में से चुनकर उन्होंने अपने  मित्रों को अपनी रचनाओं के द्वारा अमर बना दिया। 52 वर्ष की अवस्था में काशी में एक अगस्त, 1913 को देवकीनंदन खत्री का निधन हुआ। सैंकड़ों लोगों ने उन्हें पढ़ने के लिए हिंदी सीखी। रोचक प्रसंग यह है कि हिंदी चित्रपट और रंगमंच के सितारे पृथ्वीराज कपूर  प्रारम्भ में उर्दू तथा अंग्रेजी जानते थे किन्तु हिंदी नहीं। विवाह तय होने पर उनकी भावी पत्नी ने उन्हें पहला पत्र हिंदी में लिखा। समस्या यह हुई कि वे खुद पत्र पढ़ नहीं सकते थे और किसी से पढ़वा भी नहीं सकते थे। पत्नी का पत्र पढ़ने के लिये उन्होंने हिंदी सीखी। पहले पत्नी और  पृथ्वीराज जी ने हिंदी सीखी खत्री जी के उपन्यासों से ही।  

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