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मंगलवार, 2 सितंबर 2014

doha salila: sanjiv

दोहा सलिला:
संजीव
*
साँप नचाना हो गया, अब तो 'सलिल' गुनाह
डँसें साँप सम देश को, नेता पाते वाह
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बंदर पाला? जेल चल, रहे मदारी काँप
अफसर देश नचा रहे, समय-हवा को भाँप
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बलि देवी पर चढ़े तो, पाप कहे कानून
बकरा काटें ईद पर, पुण्य बहायें खून
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मंत्र शंख घंटा करें, शोर लगाते रोक
शासन सुने अजान पर, मौन हाय क्यों? शोक
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