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शनिवार, 27 सितंबर 2014

kavita: sher aur adami

कविता:

शेर के बाड़े में
कूदा आदमी
शेर था खुश
कोई तो है जो
न घूरे दूर से
मुझसे मिलेगा
भाई बनकर.

निकट जा देखा
बँधी घिघ्घी
थी उसकी
हाथ जोड़े
गिड़गिड़ाता:
'छोड़ दो'

दया आयी
फेरकर मुख
चल पड़ा
नरसिंह नहीं
नरमेमने
जा छोड़ता हूँ

तब ही लगा
पत्थर अचानक
हुआ हमला
क्यों सहूँ मैं?
आत्मरक्षा
है सदा
अधिकार मेरा

सोच मारा
एक थप्पड़
उठा गर्दन
तोड़ डाली
दोष केवल
मनुज का है

***

4 टिप्‍पणियां:

Suman ने कहा…


*****Suman*****

Bilkul sahi farmaya aapne..Hamesha doshi hum Insan hi hote hain ..Janwar nahin

sanjiv ने कहा…

suman ji dhanyavad.

Manish ने कहा…


Manish
"Nothing Can Stop The Man With The Right Mental Attitude From Achieving His Goal, Nothing On Earth Can Help The Man With The Wrong Mental Attitude..."
Good Morning ...
Have A Nice and Wonderful Day ....

sanjiv ने कहा…

thanks. manish