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मंगलवार, 30 सितंबर 2014

maiya tere roop




मैया तेरे रूप अनेक 

घर घर बैठी लाल पालती 
ज्योति दीप में सतत बालती 
शिवशंकर पर चरण धर दिए 
जयललिता माया सँवारती 


दे कुछ बुद्धि विवेक 

पत्रकार मनमानी करता 
सर दे साई बुद्धि न वरता 
खुद ही खुद को मार कुल्हाड़ी 
दोष दूसरों पर क्यों धरता?
नहीं इरादे नेक 

नाम पाक नापाक इरादे 
करता हरदम झूठे वादे 
वस्त्र न्यूनतम पहनें रहतीं 
दीन-धनी हैं भिन्न इरादे 
लोग नयन लें सेक 

भारत शक्ति नयी पायेगा 
सब जग इसके गुण जाएगा 
हर नर बने नरेंद्र, कृपा कर- 
पकड़ चरण जग तर जाएगा
सत्य शक्ति हो एक 



5 टिप्‍पणियां:

Kusum Vir kusumvir@gmail.com ने कहा…

Kusum Vir kusumvir@gmail.com

बहुत सटीक, सामयिक, यथार्थमय और सारगर्भित गीत लिखा है, आचार्य जी l
ढेरों बधाई और सराहना स्वीकार करें l
सादर,
कुसुम

sanjiv ने कहा…

कुसुम जी धन्यवाद

ksantosh_45@yahoo.co.in ने कहा…

ksantosh_45@yahoo.co.in'

आ० सलिल जी
सुन्दर गीत के लिये बधाई.
सन्तोष कुमार सिंह

Ram Gautam gautamrb03@yahoo.com ने कहा…

Ram Gautam gautamrb03@yahoo.com

आ. आचार्य 'सलिल' जी,
प्रणाम:
एक सुन्दर भावात्मक- गीत के लिए साधुवाद और बधाई !!
सादर- आरजी

sanjiv ने कहा…

संतोष जी, गौतम जी
सादर आभार