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सोमवार, 27 अक्तूबर 2014

navgeet

नवगीत:

ऐसा कैसा
पर्व मनाया ?

मनुज सभ्य है
करते दावा
बोल रहे
कुदरत पर धावा
कोई काम
न करते सादा
करते कभी
न पूरा वादा

अवसर पाकर
स्वार्थ भुनाया

धुआँ, धूल
कचरा फैलाते
हल्ला-गुल्ला
शोर मचाते
आज पूज
कल फेकें प्रतिमा
समझें नहीं
ईश की गरिमा

अपनों को ही
किया पराया

धनवानों ने
किया प्रदर्शन
लंघन करता
भूखा-निर्धन
फूट रहे हैं
सरहद पर बम
नहीं किसी को
थोड़ा भी गम

तजी सफाई
किया सफाया

***



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