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सोमवार, 3 नवंबर 2014

bal kavita:

काव्य सलिला:

बाल कविता


हम बच्चे हैं मन के सच्चे सबने हमें दुलारा है 
देश और परिवार हमें भी सचमुच लगता प्यारा है 

अ आ इ ई, क ख ग संग ए बी सी हम सीखेंगे 
भरा संस्कृत में पुरखों ने ज्ञान हमें उपकारा है 

वीणापाणी की उपासना श्री गणेश का ध्यान करें 
भारत माँ की करें आरती, यह सौभाग्य हमारा है 

साफ-सफाई, पौधरोपण करें, घटायें शोर-धुआं 
सच्चाई के पथ पग रख बढ़ना हमने स्वीकारा है 

सद्गुण शिक्षा कला समझदारी का सतत विकास करें 
गढ़ना है भविष्य मिल-जुलकर यही हमारा नारा है 


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