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शुक्रवार, 12 दिसंबर 2014

geeta jayanti

समाचार :
समाचार 
श्रीमद्भगवद्गीता जीवन दर्शन और जीवन प्रबंधन का अभूतपूर्व ग्रन्थ
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चित्र परिचय: दाहिने से आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल', स्वामी सत्यानन्द जी, स्वामी गीतानन्द जी, आचार्य देवेश शास्त्री, स्थानीय वक्ता 


इटावा, २ दिसंबर २०१४। सुप्रसिद्ध इटावा महोत्सव के अंतर्गत जनपदीय प्रदर्शनी में गीता जयंती पर विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। गीता के विद्वान स्थानीय तथा अतिथि वक्ताओं ने जीवन के विविध पक्षों को लेकर गीता को एकमात्र समाधानकारक ग्रन्थ निरूपित किया  

                                   गीता प्रबंधन कला और विज्ञान का श्रेष्ठ ग्रन्थ : आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'

मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर से पधारे विशेष अतिथि वक्ता आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ने वर्तमान शिक्षा पद्धति की विसंगतियों को इंगित करते हुए नयी पीढ़ी को उसके दुष्प्रभाव से बचने का एक मात्र उपाय भगवद्गीता को बताया तथा पाठ्यक्रम में सम्मिलित किये जाने की मांग की। आचार्य संजीव ‘सलिल’ ने श्रीमद्भगवद्गीता को कुशल ‘‘प्रबंधन-ग्रन्थ’’ की संज्ञा दी। उन्होंने युवाओं के सम्मुख आ रही समस्याओं का उल्लेख करते हुए दैनंदिन व्यवहारिक जीवन में कुशल प्रबंधन हेतु गीता के विविध अध्यायों में अन्तर्निहित सूत्रों का विश्लेषण किया। श्रोताओं द्वारा बार-बार की जा रही रही करतल ध्वनि के मध्य विद्वान वक्ता ने जीवन पथ खोज रही युवा पीढ़ी और संशयग्रस्त अर्जुन की मनःस्थिति के साम्य को इन्गिर कर समाधान हेतु श्री कृष्ण की तरह किसी निर्लोभी की शरण में जाने तथा प्राप्त मार्गदर्शन अनुसार फल की चिंता किये बिना अपनी सर्वश्रेष्ठ योग्यता और संसाधनों के सम्मिलित प्रयोग से सफलता पाने का परामर्श दिया 

गीता-ज्ञान समस्यामुक्त करता है- स्वामी गीतानन्द जी

'सभी सांसारिक समस्याओं का समाधान एक मात्र श्रीमद्भगवद्गीता है, कुरुक्षेत्र के मैदान में योगेश्वर कृष्ण द्वारा धनुर्धर अर्जुन को दिया गया ‘‘गीता-ज्ञान’’ वास्तव में जीवनशैली का आधारभूत तथ्य है, जो जीव को समस्यामुक्त करता है।' उक्त उद्गार प्रदर्शनी कैम्प में आयोजित ‘गीता जयन्ती समारोह’ में ऋषि आश्रम मैनपुरी से पधारे स्वामी गीतानन्द जी ने मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये। उन्होंने गीता के विषाद योग से लेकर सांख्य, समत्व, संन्यास व मोक्ष यज्ञ का विश्लेषण करते हुए धर्म की व्याख्या की और कहा कि महाभारत में भीष्म, द्रोण और कर्ण की मृत्यु पर उठाये जाने वाले प्रश्न निरर्थक हैं, वास्तव में अनीति, अन्याय, असत् व अज्ञान के विरुद्ध होने वाली गतिविधि ही धर्म है।
  
गीता-ज्ञान समस्यामुक्त करता है- स्वामी सत्यानन्द जी

मोक्षदा एकादशी पर जनपद प्रदर्शनी द्वारा आयोजित गीता जयन्ती की मंगलवार को अध्यक्षता करते हुए सत्यार्थ गीता के रचयिता स्वामी सत्यानन्द जी महाराज ने गीता के मूल तत्व का विश्लेषण करते हुए योग-साधना के पथ पर अपने अनुभवों का विश्लेषण तथा व्यावहारिक उपायों का निरूपण किया।  उन्होंने ततसंबंधित स्वरचित ग्रन्थ जिज्ञासुओं को निशुल्क प्रदान किये। 
 
आरम्भ में स्थानीय वक्ताओं सर्वश्री ऋषिनंदन मिश्र, गोविन्द माधव शुक्ल, राम सेवक सविता, आचार्य दिनेशानन्द, कथावाचक दद्दाजी, कैप्टन उपेन्द्र पाण्डेय, डा. भूदेव मिश्र, ब्रजानन्द शर्मा, डा. गार्गी शुक्ला, प्रदीप मिश्र आदि ने भी विचार व्यक्त किये। श्रीमती मिथलेश कुमारी ने गीता के 10 वें अध्याय का पाठ किया। कार्यक्रम संचालन तथा अतिथि परिचय देवेश शास्त्री ने किया। संयोजक प्रवीण चौधरी एडवोकेट एवं प्रदीप चौधरी ने अतिथि स्वागत कर आगन्तुक विद्वानों को प्रतीक चिन्ह प्रदान किये। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश जन मंच का सराहनीय सहयोग रहा.

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