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बुधवार, 14 जनवरी 2015

चन्द माहिया : क़िस्त 13

चंद माहिये
-आनन्द पाठक
जयपुर
:१:

इक अक्स उतर आया
दिल के शीशे में
फिर कौन नज़र आया

:२:

ता उम्र रहा चलता
तेरी ही जानिब
ऎ काश कि तू मिलता

:३:

तुम से न कभी सुलझें
अच्छा लगता है
बिखरी बिखरी जुलफ़ें

:४:

गो दुनिया फ़ानी है
लेकिन जैसी हो
लगती तो सुहानी है

:५:

वो ख़ालिक में उलझे
मजहब के आलिम
इन्सां को नहीं समझे

-आनन्द.पाठक
09413395592

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