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गुरुवार, 1 जनवरी 2015

Hindi: vesheshan

हिंदी सीखें : १.  
'विशेषण'
 'लिंक्ड इन' से इस चर्चा को यहाँ प्रस्तुत करने का उद्देश्य प्रश्न के सन्दर्भ में आपका मत प्राप्त कर अंतिम उत्तर तक पहुँचना है। इस स्तम्भ में व्याकरण और पिंगल सम्बन्धी चर्चा आप भी प्रारम्भ कर सकते हैं

Malini Pandey Hindi Teacher at Vibgyor High: इस वाक्य में से विशेषण शब्द छाँटिए- 'मैंने आकाश चूमनेवाली ऊँची-ऊँची इमारतें देखीं
GKS SENGARofficer in madhya pradesh govt. : इस वाक्य में इमारतें संज्ञा है तथा आकाश चूमनेवाली और ऊँची-ऊँची विशेषण है

Malini PandeyHindi Teacher at Vibgyor High: धन्यवाद आपका सेंगर साहब। मुझे ये बताइए कि अगर कोई ये कहे कि आकाश चूमनेवाली विशेषण नही है, तो हम उन्हें क्या उत्तर दें या फिर किस प्रकार उन्हें समझाया जाए?

Om Prakash SharmaFreelance Writer: यदि मैं कहूँ ऊँची विशेषण हो सकता है और आकाश चूमनेवाली विशेषण का विस्तार लेकिन यदि गगनचुम्बी इमारतें होता तो गगनचुम्बी विशेषण हो सकता था | विशेषण शब्द होता है, शब्द-समूह नहीं तो आपका क्या कहना है ?

Malini PandeyHindi Teacher at Vibgyor High:  शर्मा जी अगर कक्षा 8 के बच्चों को 1 अनुच्छेद दिया जाए और उसमे से विशेषण छाँटने को दिया जाए और उसमे ये पंक्ति भी हो तो हम कौन से शब्दों को रेखांकित कराएँ, सिर्फ ऊँची-ऊँची या आकाश चूमने वाली दोनों? कृपया,  साफ -साफ बतायें।

Om Prakash SharmaFreelance Writer: वैसे आकाश शब्द तो संज्ञा है। नहीं है क्या ? चूमना क्रिया

GKS SENGARofficer in madhya pradesh govt.: हिंदी व्याकरण में मूल शब्द संज्ञा है और सभी शब्द संज्ञा के आधार पर अपनी स्थिति प्रकट करते हैं अतः, 'इमारतें' के आधार पर विशेषण का चयन करना है तो 'आकाश चूमने वाली 'तथा 'ऊँची-ऊँची' विशेषता बतलानेवाले भाग होंगे क्योंकि ये शब्द-समूह 'इमारतों' की विशेषता बतला रहे हैं, जो सज्जन मना कर रहे हैं, उनसे निवेदन हैं कि यहाँ वाक्य में विशेषण को जानने का परिप्रेक्ष्य हैं पृथक-पृथक अन्वय करने पर 'आकाश' संज्ञा 'चूमना' क्रिया 'चूमनेवाली' क्रिया विशेषण 'ऊँची-ऊँची' विशेषण, 'हैं' सहायक क्रिया होगा परन्तु मालिनी जी का प्रश्न केवल विशेषण जानने के सम्बन्ध में हैं न कि अन्वय

ARUN KUMAR JHA
ARUN KUMAR JHA Hindi Officer at GTRE, DRDO,Bangalore: बोलचाल की हिंदी का एक नमूना देखें :- "( दुकानदार से ) - मोबाइल का बहुत ज्यादा दाम है"

Arvind Kumar
Arvind Kumar Experience Hindi Teacher / Corporate Trainer: आकाश चूमनेवाली, ऊँची-ऊँची।  

Om Prakash Sharma Freelance Writer: मालिनी जी शिक्षिका हैं  इनके इससे पूर्व के प्रश्न भी इसी प्रकार देखने में साधारण होते है लेकिन उनका एकदम समाधान करना कठिन होता है  उत्तर इनके पास होता है लेकिन ये अपने मत की चर्चा कर पुष्टि करना चाहती हैं।  वाक्यों में हम व्याकरण के साथ अलंकारों का भी प्रयोग करते हैं ।  ऊँची -ऊँची में भी वीप्सा या पुनरुक्ति प्रयोग किया गया है, अलंकार है इमारत ऊँची है लेकिन ऊँची के प्रभाव को अधिक दर्शाने के लिये ऊँची की एक पुनरुक्ति की गयी हैविशेषण ऊँची है आकाश को चूमनेवाली उस ऊँचाई के महत्व को दर्शाना है जिस प्रकार हम मुख के सौन्दर्य की चाँद से तुलना कर देते हैं तो चाँद विशेषण नहीं बन जाता, यदि मुख उपमेय होता है तो चाँद उपमान धृष्टता के लिए क्षमा के साथ मेरे विचार से ऊँची ही विशेषण है  

Raj MummyRaj MummyAcademic director of pssm baba thakranwala public school, chak bashesharpur.distt,jalandhar.lives in jalandhar: Sharma ji main aap ke vichar aur nirnay se sahmat hoon. bachche kis kaksha ke hain ye bhi dyan main rakhna aavashyak hai.

Om Prakash Sharma Freelance Writer: नमस्कार राज बहन जी, बच्चे तो आठवीं के हैं लेकिन वह तो अनुच्छेद देनेवाले को देखना है कि बच्चे किस कक्षा में हैं? ये तो लोक सेवा आयोग के प्रश्न पत्र जैसा प्रश्न है आठवीं तक के बच्चे से तो साधारण वाक्यों में ही विशेषण छाँटने  को कहना चाहिए

Malini Pandey Hindi Teacher at Vibgyor High: आप सभी का बहुत - बहुत धन्यवाद .....मैं जब भी कोई प्रश्न पूछती हूँ मुझे उसका उत्तर जरूर प्राप्त होता है।

Vrashabh JainVrashabh Jain Professor at Mahatma Gandhi Antararastriya Hindi University: असल में ये सारी समस्या इसलिए संभवतः हो रही है, क्योंकि हम विशेषण को केवल शब्द के स्तर पर देखने की कोशिश कर रहे हैं, वस्तुतः विशेषण को संरचना और अर्थ दोनों के स्तर पर देखने का यत्न करना चाहिए और परिभाषा इस रूप में लेनी चाहिए कि संज्ञा /विशेष्य की विशेषता बतानेवाली संरचना विशेषण कहलाती है और वह संरचना एक शब्द रूप भी हो सकती है, शब्द-युग्म भी हो सकता है, पद-बंध या उपवाक्य या वाक्य या पाठांश या पाठ तक भी हो सकती है।

Om Prakash Sharma Freelance Writer: जिस प्रश्न पर शिक्षक ही एक मत न हो उसका मूल्यांकन किस आधार पर किया जाए यह समस्या उत्पन्न होती है इसके लिये आपको व्याकरण की पुस्तकों में भी तो सुधार करना होगा और संरचना के आधार आप कैसे अर्थ ले सकते हैं उसके उदाहरण भी तो कहीं होने चाहिए। आपने कहा कि वह संरचना एक शब्द रूप भी हो सकती है, शब्द-युग्म भी हो सकता है, पद-बंध या उपवाक्य या वाक्य या पाठांश या पाठ तक भी हो सकती है। जब वाक्य ही विशेषण हो सकता है तो वाक्य विश्लेषण की आवश्यकता ही क्या है?

Vrashabh Jain Professor at Mahatma Gandhi Antararastriya Hindi University: माननीय शर्मा जी, कृपया समझने की कोशिश कीजिए। केवल जबाव देने के लिए उत्तर मत दीजिए। सार्थक भाषा में सदा दो चीजें रहती हैं-- १. संरचना और २. अर्थ। अर्थ के बिना भाषिक संरचनाएँ किसी काम की नहीं और संरचना के बिना अर्थ व्यक्त नहीं हो सकता। भाषा होने के लिए दोनों एक दूसरे के पूरक बनते हैं। एक काम का नहीं, तो दूसरा बेकार और ऐसे ही दूसरा काम का नहीं, तो पहला बेकार। आप शब्द के विशेषण प्रयोग के बहुत सारे उदाहरण जानते ही हैं। उपवाक्य के विशेषण रूप का उदाहरण दे रहा हूँ--- 
राम, जो दशरथ के पुत्र थे, चौदह वर्ष के लिए वन गए थे। 
उक्त वाक्य में 'जो दशरथ के पुत्र थे' उपवाक्य के रूप में विशेषण का उदाहरण है। ऐसे ही जो परिभाषा मैंने ऊपर दी है, उसके आधार पर अन्य संरचनाएँ भाषा में ढूँढ़ने का प्रयास तो कीजिए, जरूर मिलेंगी और जब आप एक बार ढूँढ लेंगे, तो हिन्दी व्याकरण का विशेषण भी अपने-आप समझ में आ जाएगा और तब शिक्षक व विद्यार्थी दोनों के सामने वे समस्याएँ नहीं आएँगी, जिनकी आप बात कर रहे हैं। सस्नेह ... 

Om Prakash Sharma Freelance Writerआदरणीय वृषभ जैन जी, शब्दजाल से किसी के प्रश्न का सही उत्तर नहीं निकलता | राम, जो दशरथ के पुत्र थे में 'जो दशरथ के पुत्र थे' राम कर्ता का विस्तार है| यह उपवाक्य किसी प्रकार् की विशेषता नहीं बता रहा | हाँ, यदि यह कहा जाए कि राम, जो दशरथ के पुत्र थे,पराक्रमी थे ' तो पराक्रमी अवश्य विशेषण होगा | धृष्टता के लिए क्षमा | मैं कोई विद्वान नहीं हूँ निरंतर स्वयं को विद्यार्थी ही समझता हूँ चर्चा में भाग ले निरंतर सीखने का प्रयास करता हूँ |।'

Vrashabh Jain Professor at Mahatma Gandhi Antararastriya Hindi University: 'जो दशरथ के पुत्र थे' इसकी जगह 'जो बहुत सुन्दर दिख रहे थे' यह उपवाक्य भी हो सकता है / लिया जा सकता है। ये दोनों उपवाक्य विस्तार भी हैं और विशेषण भी। यह वैसे ही है, जैसे-- राम संज्ञा भी है और कर्ता भी। भाषा में एक ही संरचना कई बार कई-कई भूमिकाएँ अदा करती है। 
आप महान हैं और किसी को भी कुछ भी कह सकते हैं। इसलिए मैं आपके इस स्वरूप को प्रणाम करता हूँ। कोई समझना न चाहे और केवल तर्क के लिए तर्क करना चाहे, तो उसे ब्रह्मा भी नहीं समझा सकता। .... इसलिए अब इस बिंदु पर आप जैसे महान विद्वान से मैं क्या बात करूँ ? ---मैं अधकचरा-सा अज्ञानी समझ नहीं पा रहा हूँ। आप से ज्ञानी को एक बार फिर प्रणाम। आप चाहें, तो जो रास्ता ऊपर मैंने बताया है, उस पर चलकर देख लें और फिर कोई समस्या आए, तो बताएँ। … शायद मैं कुछ तब मदद कर पाऊँ। सादर।

Om Prakash Sharma Freelance Writer; वृषभ जैन जी नमस्कार,जो बात आपने मुझे कही है वही बात आप पर भी लागू होती है क्योंकि जब हम एक अंगुली दूसरी की ओर उठाते हैं तो तीन अंगुलियाँ अपनी ओर भी इशारा करती है | यह चर्चा है और विद्वान भी चर्चा कर रहे हैं और चर्चा अभी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुँची | एक वाक्य में एकाधिक संज्ञा, सर्वनाम , और विशेषण हो सकते है लेकिन कोई वाक्य या उपवाक्य विशेषण नहीं हो सकता | विशेषण वाले उपवाक्य को विशेषण वाक्यांश अथवा विशेषण खंड कहते है अंगरेजी में उसे adjective न कहकर adjective clause कहा जता है | विद्यालय में और कालेजों में विद्यार्थी को डराकर चुप करवाया जाता है लेकिन चर्चा करते समय जब चर्चा करने वाला दूर होता है अपने तर्क देकर सार्थक चर्चा करने का आनंद लेना चाहिए | साभार |

Vrashabh Jain Professor at Mahatma Gandhi Antararastriya Hindi University: आदरणीय,  आपने स्वयं उत्तर दे दिया। यदि उपवाक्य विशेषण नहीं होता, तो-फिर भला वह विशेषण उपवाक्य क्यों या किसलिए कहलाता? सादर और सप्रणाम

Om Prakash Sharma Freelance Writer: विशेषण उपवाक्य में विशेषण के साथ और शब्द भी जुड़े होते है लेकिन विशेषण की प्रधानता होती है उसमें सारे शब्द विशेषण नहीं होते | Adjectives modify nouns and pronouns, giving a description or more information. An adjective clause is simply a group of words with a subject and a verb that provide a description. The clause starts with a pronoun such as who, whom, that, or which or an adverb such as when, where and why.

Vrashabh Jain Professor at Mahatma Gandhi Antararastriya Hindi University: आपने ऊपर किये गए मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं दिया। कृपया तलाशें और दें। नीचे के दोनों कथन अपनी जगह ठीक हैं। .... पर ऊपर का प्रश्न भी कुछ कह रहा है, उसे सुनिए, kitaabon mein dii gayii nimna paribhaashaa poorii tarah thiik nahiin hai- Adjectives modify nouns and pronouns, giving a description or more information. An adjective clause is simply a group of words with a subject and a verb that provide a description. The clause starts with a pronoun such as who, whom, that, or which or an adverb such as when, where and why. ise honaa yuun chaahie-
Adjectival Structures modify nouns and pronouns, and other structures also, giving a description or more information. An adjective clause is simply a group of words with a subject and a verb that provide a description. The clause starts with a pronoun such as who, whom, that, or which or an adverb such as when, where and why.

Om Prakash Sharma Freelance Writer: Adjectives और An adjective clause में ही तो अंतर दर्शाया गया है अब आप इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना कर बैठे हैं तो मैं आपसे बहस नहीं करना चाहता कोई अन्य प्रतिभागी भी अपना मत व्यक्त करेगा तो हल निकल आएगा | आप तो पुस्तकों को ही गलत बता रहे हैं तो मैं क्या कह सकता हूँ | आप ही इसकी पुष्टि के लिए कुछ सुझाइए |

Vrashabh Jain Professor at Mahatma Gandhi Antararastriya Hindi University: हिंदी का व्याकरण हिंदी की प्रकृति को ध्यान में रखकर अभी तक नहीं लिखा गया। अब तक हिंदी व्याकरण पर जो पुस्तकें उपलब्ध हैं, उनमें परिभाषाएँ अँग्रेजी व्याकरण की किताबों से दी गई हैं और उदाहरण हिन्दी के प्रयोग से। इसलिए इस तरह की समस्याएँ आ रही हैं और इसीलिए पद्मश्री पद्म-भूषण श्रद्धेय आचार्य पंडित श्री विद्यानिवास मिश्र जी के निर्देशन में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय ने हिंदी व्याकरण परियोजना प्रारम्भ की थी। उसके पूरे होते ही इस तरह की समस्याएँ अपने-आप दूर हो जाएँगी। आप भी अपनी परेशानियाँ विश्वविद्यालय के कुलपति जी को या मुझे लिख सकते हैं, जिससे उनका खास ध्यान रखा जा सकेगा। इसलिए अब विशेषण की परिभाषा यूँ ली जानी चाहिए-- किसी भी आधारभूत संरचना की विशेषता बताने वाली संरचना विशेषण-संरचना कहलाती हैं और उसका प्रमुख निर्धारण अर्थ की समझ के आधार पर होता है। जिन्होंने चर्चा में भाग लिया और जिन्होंने नहीं भी लिया पर जिनके निमित्त ये चर्चा हुई, वे सभी मेरे प्रणाम स्वीकारें। सादर…।

Om Prakash Sharma Freelance Writer: मैने कामता प्रसाद गुरु से लेकर कई व्याकरण पढे हैं । हिन्दी व्याकरण का मूल आधार संस्कृत है अंग्रेजी के व्याकरण नहीं। मेरी कोई समस्या नहीं है। हिन्दी निदेशालय समय-समय पर इन पर चर्चा करवाता रहता है । राष्ट्रीय शिक्षा और अनुसन्धान परिषद द्वारा निर्मित भी व्याकरण है। मैं चर्चा अवश्य करता हूँ लेकिन उसका उद्देश्य सभी की शंकाओं का समाधान होता है अपनी बात ऊपर रखना नहीं । जीवन के अंतिम पडाव में मैं इससे क्या करूंगा? ‘ इस वाक्य में से विशेषण शब्द छाँटिए मैंने आकाश चूमने वाली ऊँची-ऊँची इमारतें देखीं।‘ प्रश्न को ध्यान से देखिए इस में ‘शब्द’ शब्द का प्रयोग किया गया है शब्दों या उपवाक्य का नहीं । वैसे मालिनी बहन को भी इस पर प्रतिक्रिया देनी चाहिए ।

Vrashabh Jain Professor at Mahatma Gandhi Antararastriya Hindi University: कामता प्रसाद गुरु के भी हिन्दी व्याकरण की अधिकाँश परिभाषाएँ अंग्रेज़ी के नेसफील्ड के व्याकरण से सीधे अनुवाद कर रख दी गई हैं और उदाहरण केवल हिंदी से दिए गए हैं। इसीलिए हिंदी, मराठी आदि भारतीय भाषाओं के व्याकरण उनकी प्रकृति के अनुसार लिखे जाने की जरूरत है। आप वरिष्ठजन हैं। अतः मैं अकिंचन आपको प्रणाम करता हूँ। आपको ऐसा लगा कि मैं अपनी बात ऊपर रखने की कोशिस कर रहा हूँ, इसके लिए क्षमा-याचना करता हूँ और कोशिश करूँगा कि भविष्य में मुझसे ऐसा न हो, एक बार फिर ऎसी क्षमा-याचना के साथ.…

Malini Pandey Hindi Teacher at Vibgyor High:  मैं आप दोनों का बहुत आभार प्रकट करती हूँ । आप दोनों को मेरा नमस्कार। मैं आप लोगों की तरह व्याकरण का इतना ज्ञान तो नहीं रखती पर हाँ मैं ये कहना जरूर चाहूंगी की जो बात जैन साहब कह रहे हैं वो बच्चों को इतनी आसानी से समझ नही आएगी, और अगर विशेषण की परिभाषा बदलकर उक्त लिखित भी हो तो वह पाठकों के लिए बहुत ही कठिन है। मेरे समझ से व्याकरण की भाषा बहुत ही सरल और सीधी होनी चाहिए। और रही बात हिन्दी में इतनी दिक्कतों की और मत इसलिए भी सब के अलग-अलग हो जाते हैं क्योकि हिन्दी ही सिर्फ एकमात्र भाषा है जिसमे कई भाषाओं के शब्द सम्मिलित हैं। अँग्रेजी के अध्यापकों को य दिक्कतें नहीं आतीं.......  मेरे हिसाब से शर्मा जी का कथन सही है...... क्योकि मैं ये खुद सोच रही हूँ की अगर मैं बच्चों से ये बोलूँ की पूरा का पूरा पाठ भी विशेषण हो सकता है तो वो आगे मेरी बातों को समझ भी नही पायेंगे।

Om Prakash Sharma Freelance Writer: संज्ञा ,सर्वनाम ,विशेषण , क्रिया भेद प्रत्येक भाषा में मिलते है, आप् अपनी स्थानीय बोली में भी इनका प्रयोग करते हैं । यदि हिन्दी में कहीं दुविधा महसूस होती है तो अन्य भाषाओं का यदि किसी को ज्ञान है तो उनमें समझने का प्रयास करना चाहिए। इंसान गलती का पुतला है मैं तो सेवानिवृत भी शिक्षिक हूँ गलत हो सकता हूँ लेकिन मैं सभी वैयाकरणों को गलत कह, किसी मत का समर्थन कैसे कर सकता हूँ ?

ARUN KUMAR JHA Hindi Officer at GTRE, DRDO,Bangalore: व्याकरण से अधिक भाषा के विभिन्न प्रकार की उपयोगी संरचनाओं के विकास एवं प्रयोग की जरूरत हिन्दी को है ताकि इसके अनुप्रयोगों पर भरोसा कायम हो | ....'काव्य शास्त्र विनोदेन... ' आज के परिप्रेक्ष्य में कठिन व अनुर्वरक जान पड़ता है |  स्कूलों में उदाहरण और अभ्यास के लिए पाठ्य-सामग्री के चयन में पर्याप्त सावधानी की आवश्यकता है | उदाहरण या अभ्यास सोच -समझ कर दिए जाने चाहिए ताकि भ्रम की स्थिति न बने | संक्षेप में यह पूरा मसला शिक्षण-प्रशिक्षण की पद्धतियों की उपयोगिता व विश्वसनीयता से जुड़ा प्रतीत होता है |

Vrashabh Jain Professor at Mahatma Gandhi Antararastriya Hindi University: आप सबके विचारों से प्रस्तुति और समझ के नए अवसर विकसित हो रहे हैं, इसलिए मैं आप सब का आभारी हूँ।  असल में हम जो बोलते और सुनते हैं, वह भाषा की संरचना होती है और जो समझते हैं, वह अर्थ। 
श्री अरुण झा जी ने बड़ी अच्छी बात कही। जिससे दिशा यह मिलती है कि यदि विद्यार्थी को हम वाक्य तक का विश्लेषण सिखाने जा रहे हैं, तो उस विश्लेषण में पाठांश और पाठ विशेषण के रूप में मिलेगा ही नहीं, क्योंकि वहाँ हमारे विश्लेषण की शीर्षतम इकाई वाक्य ही है और उससे ऊपर की संरचना हमारे विश्लेषण का अंग ही नहीं है पर इससे यह भी अनदेखा नहीं किया जा सकता कि उससे ऊपर की संरचना विशेषण नहीं हो सकती या उसमें विशेषण नहीं मिल सकता। भाषिक प्रयोगों में कई बार देखा यह गया है कि पूरे का पूरा लेख या पूरी की पूरी कहानी किसी की कोई विशेषता बताने के लिए लिखी गई होती है, -ऎसी स्थिति में पूरे का पूरा लेख या पूरी की पूरी कहानी विशेषण की भूमिका निभाती है। अतः, विशेषण की परिभाषा पूरी भाषा को ध्यान में रखकर ही निर्धारित की जानी चाहिए, कुछ अंश को नकारकर नहीं, अनदेखा कर नहीं। हाँ, यह जरूर हो सकता कि जिसे सिखाना है, उसके स्तर के अनुसार कुछ मॉडिफिकेशंस किए जा सकते हैं या किए जाने चाहिए। … और इस प्रकार भाषा-शिक्षण में या व्याकरण-शिक्षण में "क्या सिखाना है?… किसे सिखाना है? और जो सिखाना है, उस इकाई की भाषा में क्या स्थिति है, -इन तीनों बातों को ध्यान में रखकर शिक्षण-पद्धति का विकास किया जाना चाहिए। इसके बिना किया गया भाषा या व्याकरण का शिक्षण समस्या ही पैदा करेगा। सादर, सप्रणाम।

Om Prakash Sharma Freelance Writer: शब्द के अर्थ के लिए शब्द शक्तियों का सहारा लिया जाता है शब्द संरचना से अर्थ का बोध नहीं होता | "-ऎसी स्थिति में पूरे का पूरा लेख या पूरी की पूरी कहानी विशेषण की भूमिका निभाती है।' इस उक्ति से ही विशेषण के ज्ञान का बोध हो गया | धन्यवाद | 
झा जी मैं आपकी इस बात से-स्कूलों में उदाहरण और अभ्यास के लिए पाठ्य-सामग्री के चयन में पर्याप्त सावधानी की आवश्यकता है | उदाहरण या अभ्यास सोच -समझ कर दिए जाने चाहिए ताकि भ्रम की स्थिति न बने' पूर्णरूपेण सहमत हूँ |

Vrashabh Jain Professor at Mahatma Gandhi Antararastriya Hindi University: "शब्द के अर्थ के लिए शब्द शक्तियों का सहारा लिया जाता है" -यह विचार ठीक है, पर प्रश्न है कि वे शक्तियाँ या वह शब्द-शक्ति रहती कहाँ है ? … क्या केवल शब्द-भर के भीतर या शब्द-संरचना के भीतर, यदि केवल शब्द-भर के भीतर रहने वाली शब्द-शक्ति मान ली जाएगी, तो फिर व्यंजना और लक्षणा न घट पाएगी, इसलिए शब्द-शक्ति शब्द-भर में नहीं, शब्द-संरचना में रहती है और वह तो शब्द-संरचना में रहने वाले अर्थ को व्यक्त भर करती है, यदि उसमें अर्थ न हो, तो वह व्यक्त भी न कर पाए।  "शब्द संरचना से अर्थ का बोध नहीं होता |" -यदि ऐसा मान लिया जाएगा, तो इससे कई समस्याएँ पैदा हो जाएँगी। पहली निरर्थक शब्द-संरचना भी भाषा का अंग बनने की अधिकारी होने लग जाएगी और दूसरी जब शब्द-संरचनाओं से अर्थ का बोध ही न होगा, तो उनका अर्थात शब्द-संरचनाओं का भाषा में होने का कोई प्रयोजन ही न रह जाएगा। सादर, सप्रणाम।

Malini Pandey Hindi Teacher at Vibgyor High: जैन जी के कथन अनुसार-यदि विद्यार्थी को हम वाक्य तक का विश्लेषण सिखाने जा रहे हैं, तो उस विश्लेषण में पाठांश और पाठ विशेषण के रूप में मिलेगा ही नहीं, क्योंकि वहाँ हमारे विश्लेषण की शीर्षतम इकाई वाक्य ही है और उससे ऊपर की संरचना हमारे विश्लेषण का अंग ही नहीं है । उसी प्रकार मेरा भी प्रश्न सिर्फ विशेषण रेखांकित करने से ही था, मुझे बच्चों को उनके कक्षा के अनुसार ही बताना होता है। कृपया मार्गदर्शन करें

Sanjiv Verma Ex Divisional Project Manager / Executive Engineer at MPPWD: मालिनी जी! वन्दे भारत-भारती। इस चर्चा में आपके विद्यार्थी की तरह सम्मिलित हो रहा हूँ आपका प्रश्न प्राथमिक-माध्यमिक स्तर के विद्यार्थी को विशेषण की परिभाषा और उदहारण बताने तक सीमित हैआपको अपने विद्यार्थी की जिज्ञासा शांत करने और परीक्षा में अंक दिलानेवाला उत्तर चाहिए। आपको हिंदी भाषा की प्रकृति, उसके उद्भव या संस्कृत से सम्बन्ध के परिप्रेक्ष्य से कुछ सरोकार नहीं है. आप सही भी हैं 

उक्त चर्चा में प्रमुखतः २ मत हैं. १. विशेषण केवल 'ऊँची-ऊँची' है, २. विशेषण 'ऊँची-ऊँची' तथा 'आकाश चूमनेवाली' दोनों हैं 'मैंने आकाश चूमनेवाली ऊँची-ऊँची इमारतें देखीं' इसके २ भाग करें १. मैंने आकाश चूमनेवाली इमारतें देखीं २. मैंने ऊँची-ऊँची इमारतें देखीं। इनमें विशेषण के सम्बन्ध में २ मत नहीं हो सकते। 

'आकाश चूमनेवाली' इमारतें तो 'ऊँची-ऊँची' ही होंगी। अतः, 'आकाश चूमनेवाली' के साथ 'ऊँची-ऊँची' अनावश्यक शब्द प्रयोग का भाषा-दोष है संभवतः, ८वीं के पाठ्यक्रम में 'वाक्य दोष' और 'शब्द दोष' न होगा। तभी यह वाक्य दिया गया है। दूसरे वाक्य में 'ऊँची-ऊँची इमारतें' ऐसी भी ही सकती हैं जो 'आकाश चूमने' जितनी ऊँची न हों, तब विशेषण 'ऊँची-ऊँची' की विशेषता 'आकाश चूमनेवाली' बताता है। मेरी जानकारी के अनुसार क्रिया की विशेषता बतानेवाला क्रिया विशेषण होता है, किन्तु संज्ञा की विशेषता बतानेवाला संज्ञा विशेषण या विशेषण की विशेषता बतानेवाला कोई विशेषण नहीं होता। ऐसी स्थिति में 'आकाश चूमनेवाली' और  'ऊँची-ऊँची' ये दोनों ही विशेषण होंगे।      
भाषा विज्ञान की दृष्टि से माननीय वृषभ जैन जी पूरी तरह सही हैं। भाषा जड़ नहीं गतिशील होती है, भाषा का व्याकरण और पिंगल भी समय के साथ बदलता और विकसित होता है। वर्तमान खड़ी या टकसाली हिंदी की आधारशिला रखी समय संस्कृत और अंग्रेजी की सहायता ली गयी किन्तु अब हिंदी का अपना कोष इतना समृद्ध हो गया है वह अपनी प्रकृति और परिवेश के अनुरूप मानक गढ़ सके। इन्हीं का संकेत श्री जैन ने किया है किन्तु यह चर्चा शालेय स्तर पर नहीं स्नातकोत्तर स्तर पर प्रासंगिक है

माननीय शर्मा जी निस्संदेह हिंदी के विद्वान हैं किंतु अंग्रेजी ग्रामर या गुरु जी की व्याकरण के बाद हुए हिंदी के विकास के परिप्रेक्ष्य में हुए शोध और परिवर्तनों को नकारा नहीं जा सकता। विद्यार्थी के स्तर के अनुसार शोधपरक ज्ञान भले ही न दिया जा सके किन्तु उसे अमान्य भी नहीं किया जा सकता। भौतिकी में शालेय स्तर पर पढ़ाया जाता है कि प्रकाश सीधी रेखा में गमन करता है, जबकि स्नातक स्तर पर पढ़ाया जाता है कि प्रकाश तरंग के रूप में गमन करता है। उच्च स्तर की जानकारी  न भी दी जा सके पर उसे अमान्य नहीं किया जा सकता। शिक्षक दोनों से अवगत हो और विद्यार्थी को पाठ्यक्रम के अनुसार जानकारी दे यही अभीष्ट है। मेरी अभिव्यक्ति में कोई त्रुटि हो या इससे किसी को ठेस लगे तो अग्रिम क्षमाप्रार्थी हूँ, ऐसा मेरा मंतव्य नहीं है


Vrashabh Jain Professor at Mahatma Gandhi Antararastriya Hindi University: मैं इस मत से सहमत नहीं हूँ कि " विशेषण की विशेषता बतानेवाला कोई विशेषण नहीं होता", बल्कि तथ्य यह है कि विशेषण की विशेषता बतानेवाला या विशेषण की विशेषता बतानेवाली संरचना प्र-विशेषण कहलाती है, इसीलिए तो 'लड़का बहुत सुन्दर है' में 'बहुत' प्र-विशेषण है, क्योंकि वह 'सुन्दर" की गुणवत्ता या विशेषता या मात्रा बता रहा है। 

....पर मेरे उक्त कथ्य का मतलब ये नहीं लिया जाना चाहिए कि मूल विश्लेष्य वाक्य में कोई प्र-विशेषण है या नहीं, क्योंकि उस पर चर्चा करना यहाँ अभिप्रेत नहीं है। सादर, सप्रणाम। 

Om Prakash Sharma Freelance Writer: वर्मा जी नमस्कार , चर्चा का उद्देश्य किसी परिणाम तक पहुँचना होता है या कहो होना चाहिए | आपने जो जानकारी दी एक महत्त्वपूर्ण जानकारी है लेकिन आपकी इस बात से मैं बिलकुल सहमत नहीं हूँ कि ' मेरी जानकारी के अनुसार क्रिया की विशेषता बतानेवाला क्रिया विशेषण होता है, किन्तु संज्ञा की विशेषता बतानेवाला संज्ञा विशेषण या विशेषण की विशेषता बतानेवाला कोई विशेषण नहीं होता| वास्तव में संज्ञा व सर्वनाम की विशेषता बताने वाला शब्द ही विशेषण होता है दूसरे शब्दों में जो संज्ञा या सर्वनाम के गुणों को बताए वह विशेषण है | हमारे लिए यह प्रश्न चर्चा का है लेकिन विद्यार्थी के लिए यह अंकों का है जिस पर उसका उत्तीर्ण या अनुतीर्ण होंना निश्चित हो सकता है | वर्मा जी धृष्टता के लिए क्षमा और देर से ही सही अपना मत रखने के लिए आभार |

Vrashabh Jain Professor at Mahatma Gandhi Antararastriya Hindi University: १- आदरणीय वर्मा जी के इस उक्ति-अंश "' मेरी जानकारी के अनुसार क्रिया की विशेषता बतानेवाला क्रिया विशेषण होता है, किन्तु संज्ञा की विशेषता बतानेवाला संज्ञा विशेषण" में तो मुझे कुछ ख़ास समस्या सतही तौर पर नहीं दिख रही है। इसके अलाबा और भला क्या परिभाषा हो सकती है?---- आदरणीय शर्मा जी या प्रिय मालिनी जी या अन्य कोई मित्र कुछ-और मार्ग-दर्शन करें, ताकि उसका भी कुछ हल ढूँढने का प्रयास हम लोग मिलकर कर सकें। 

२. यहाँ प्रश्न लोगों का न अंक पाने का है और न देने का है। यहाँ तो हम लोग भाषा और व्याकरण शिक्षण में आने वाली समस्याओं को समझने और उनके हल निकालने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उनका सम्यक् समाधान अगली पीढ़ी के लिए किया जा सके और उसके अनुसार शिक्षण के पाठ तैयार किये जा सकें,… और फिर इसके बाद उन सबको सँजोता हुआ व्याकरण का शास्त्र या पुस्तकें समृद्ध की जा सकें।

३. मैं व्यक्तिशः आप सब विज्ञ जनों का कृतज्ञ हूँ, क्योंकि सार्थक चर्चाकर आपने मुझे समस्या का खोजने में लगाए रखा, जिससे मैं कुछ राह आगे बढ़ सका। सादर व स-नमन

ARUN KUMAR JHA Hindi Officer at GTRE, DRDO,Bangalore: व्याकरण के भरोसे भाषा में नवीन विचारों को प्रश्रय देना प्राय: संभव नहीं होता, इसलिए अध्ययन के आरंभिक स्तर पर भाषा-शिक्षण में व्याकरण की भूमिका सीमित हो और व्याकरण की जगह वहां नवीन भाषिक प्रयोगों के अभ्यास को वरीयता दी जाए, ऐसा कहना वर्तमान चर्चा के प्रसंग में उपयुक्त जान पड़ता है | 

ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र बड़ी तेजी से विकसित हो रहे हैं | नित जो नई जानकारियाँ सामने आ रही हैं, उन्हें हिंदी भाषा में सहज रूप से अभिव्यक्त करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए | इस काम में काफी सावधानी बरतने की जरूरत है ताकि जो पाठ इस प्रक्रिया से उभरें, वे अनगढ़ न लगें, विश्वसनीय हों और पाठकों की जरूरत को पूरा कर सकें| संक्षेप में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भाषा के रूप में हिंदी को महत्वपूर्ण बनाने की जरूरत है|

Om Prakash Sharma Freelance Writer: महोदय हम शब्द की बात कर रहे है आप संरचना को बीच में क्यों जोड़ते जा रहे है |

Sanjiv Verma Ex Divisional Project Manager / Executive Engineer at MPPWD: कभी नहीं से देर भली... चर्चा से प्रारम्भ से जुड़ा रहने पर भी कुछ कहना जब उपयुक्त लगा कह दिया। 'क्रिया विशेषण' की तरह 'संज्ञा विशेषण' या 'सर्वनाम विशेषण' न लिखे जाने का कारण उनका 'विशेषण' शब्द से इंगित होना है। 

शालेय स्तर पर 'प्रविशेषण' मुझे किताबों में नहीं दिखा। अतः मैंने खुद को शालेय विद्यार्थी के स्तर पर रखते हुए अपनी बात कही। 'प्रविशेषण' शालेय पाठ्यक्रम में जोड़ने के बाद ही उस स्तर पर विद्यार्थी इसे जानेगा अन्यथा विद्यार्थी की जानकारी में विशेषण' 'और क्रिया विशेषण' दो ही शब्द होंगे और वह इन्हीं के आधार पर उत्तर देगा। विचार यह हो कि 'प्रविशेषण' शब्द की जानकारी के बिना विद्यार्थी 'प्रविशेषण' को स्वतंत्र विशेषण कहे या विशेषण के साथ जोड़कर विशेषण कहे। मूल वाक्य  'मैंने आकाश चूमनेवाली ऊँची-ऊँची इमारतें देखीं' में विद्यार्थी के पास उत्तर देने के कितने विकल्प हैं? १.  आकाश चूमनेवाली, २.ऊँची-ऊँची, ३.आकाश चूमनेवाली ऊँची-ऊँची तथा ४.आकाश चूमनेवाली और ऊँची-ऊँची। मालिनी जी इनमें से वह एक उत्तर जानना चाहती हैं जो पूरी तरह सही है। मेरे मत में प्रविशेषण से परिचित हुए बिना क्रमांक ३ व ४ तथा प्रविशेषण की जानकारी पाठ्यपुस्तक में होने पर क्रमांक २ सही होना चाहिए।  

शेष चर्चा शालेय शिक्षक या छात्र की नहीं भाषा विज्ञान और व्याकरण के जिज्ञासुजनों से जुडी है. श्री शर्मा अब तक की स्थिति को सामने ला रहे हैं तो श्री जैन भावी भाषायी विकास और परिवर्तन को सामने रख रहे हैं. चूँकि वर्तमान व्यवस्था में भाषा निर्माण भी शासकीय उपक्रम है तथा शिक्षा भी सरकार का विषय है, अत: श्री जैन द्वारा इंगित तथ्य आज नहीं तो कल पाठ्यक्रम में होंगे ही।  व्याकरण हो या पिंगल नवीन विचार और धारणाएं अपना स्थान बना ही लेती हैं किन्तु उन्हें आरंभिक अस्वीकार्यता झेलना पड़ती है। क्रमशः यथास्थितिवादियों का विरोध घटने पर स्वीकार्यता होती है। इसमें समय लगता है

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