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रविवार, 4 जनवरी 2015

navgeet: sanjiv

नवगीत:
संजीव
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भारतवारे बड़े लड़ैया
बिनसें हारे पाक सियार 
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घेर लओ बदरन नें सूरज
मचो सब कऊँ हाहाकार
ठिठुरन लगें जानवर-मानुस
कौनौ आ करियो उद्धार
बही बयार बिखर गै बदरा
धूप सुनैरी कहे पुकार
सीमा पार छिपे बनमानुस
कबऊ न पइयो हमसें पार
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एक सिंग खों घेर भलई लें
सौ वानर-सियार हुसियार
गधा ओढ़ ले खाल सेर की
देख सेर पोंके हर बार
ढेंचू-ढेचूँ रेंक भाग रओ
करो सेर नें पल मा वार
पोल खुल गयी, हवा निकर गयी
जान बखस दो करें पुकार
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(प्रयुक्त छंद: आल्हा, रस: वीर, भाषा रूप: बुंदेली)

 
   

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