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शनिवार, 7 फ़रवरी 2015

muktika: sanjiv

मुक्तिका:
क्या बताएं?…
संजीव
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फैसले नज़दीकियों के दरमियाँ हैं
क्या बतायें हम जी क्या मजबूरियाँ हैं

फूल तनहा शूल के घर महफ़िलें हैं
तितलियाँ हैं या हसीं मग़रूरियाँ

नुमाइंदे बोटियाँ खा-खा परेशां
वोटरों को चाँद जैसी रोटियाँ हैं

फास्ट रोज़ा व्रत करो कब कहा उसने?
छलावा करते रहे पंडित-मियाँ हैं

खेल मैदां पर न होता खेल जैसा
खिलाडी छिप चला करते गोटियाँ हैं

'सलिल' गर्मी प्यास है पानी नहीं है
प्रशासन मुस्तैद मँहगी टोटियाँ हैं

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