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रविवार, 8 फ़रवरी 2015

navgeet; sanjiv

नवगीत:
संजीव
.
तह करके 
रख दिये ख्वा सब 
धू दिखाकर 
मर्तबान में  

कोशिश-फाँकें 
बाधा-राई-नोन 
समय ने रखा अथाना 
धूप सफलता 
मिल न सकी तो 
कैसा गना, किसे गलाना?
कल ही  
कल को कल गिरवी रख  
मोल पा रहा वर्तमान में  
. 
सत्ता सूप  
उठाये घूमे  
कह जनगण से 'करो सफाई'  
पंजा-झाड़ू
संग नहीं तो 
किसने बाती कहो मिलायी?
सबने चुना 
हो गया दल का  
पान गया ज्यों पीकदान में.
.
८-२-२०१५ 

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