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बुधवार, 15 अप्रैल 2015

कानपूर भ्रमण: १० - १३ अप्रैल २०१५


कानपूर में ११-१२ अप्रैल को शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के तत्वावधान में भारतीय भाषाओँ की वैज्ञानिकता एवं सन्निकटता विषय पर राष्ट्रीय परिसंवाद संपन्न हुआ. 


इसका उद्घाटन माननीय श्री राम नाइक राज्यपाल उत्तर प्रदेश के कर कमलों से संपन्न हुआ.                                                                 
श्री अतुल कोठारी सचिव शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास दिल्ली, प्रो. मोहनलाल छीपा कुलपति अटलबिहारी बाजपेयी हिंदी विशवविद्यालय भोपाल, डॉ. कैलाश विश्वकर्मा राष्ट्रीय संयोजक वैदिक गणित, प्रो. वृषभप्रसाद जैन पूर्व सलाहकार भारतीय विश्वविद्यालय संघ, डॉ. राजेश श्रीवास्तव बुदनी, डॉ. जीतेन्द्र शांडिल्य, डॉ.अनूप शर्मा आदि के साथ मैंने भी दोनों दिन सहभागिता की.                                                                       

प्रथम सत्र में भारतीय भाषाओँ का समन्वय- दशा व् दिशा, द्वितीय सत्र में भारतीय भाषाओँ की सन्निकटता, तृतीय सत्र में भाषागत चिंतायें: विरोध व् वैमनस्यता कारण व् निवारण, चतुर्थ सत्र में भारतीय भाषाओँ की वैज्ञानिकता में निहित विज्ञानं तथा पंचम सत्र में वर्तमान संदर्भ में भारतीय भाषा आन्दोलन विषयों पर सारगर्भित विचार विनिमय हुआ.                                          
परिसंवाद संयोजक श्री यशभान सिंह तोमर ने अथक परिश्रम कर इसे मूर्त रूप दिया.                                                               
हीरालाल पटेल इन्त्र्नेश्नल स्कूल के संस्थापक श्री हीरालाल पटेल तथा प्रबंधक श्री अरुण पटेल, आकाश उद्घोषिका श्रीमती रंजना यादव, श्री उमेश सिंह तोमर, श्रीमती डॉ. मोहिनी अग्रवाल, डॉ. उमेश पालीवाल, डॉ. नीलम त्रिवेदी, डॉ. अंगद सिंह, डॉ. अनूप सिंह, श्री शारदा दीन, डॉ. हिना अफ्सां, श्री सुजीत सिंह आदि ने जी-जान लगाकर आयोजन में प्राण फूंके

                                                      श्रीमती अन्नपूर्णा बाजपेई, श्रीमती कल्पना मिश्र, श्रीमती मीना बाजपेई, श्रीमती लक्ष्मी आदि से नवगीत तथा अन्य साहित्यिक विधाओं पर सार्थक चर्चाएँ हुईं.                                                    
समापन सत्र में शरू अतुल कोठारी के कर कमलों से स्मृतिचिन्ह के रूप अपने आदर्श स्वामी विवेकानंद की कांस्य प्रतिमा प्राप्तकर धन्यता की प्रतीति हुई.                                                  
आजकल एक के साथ एक मुफ्त का चलन है. मुझे तो दो अन्य लाभ मिले:                           
१. नेताजी सुभाष चन्द्र बोस से सम्बंधित दस्तावेजों को सार्वजनिक कर विमान दुर्घटना व् अन्य सत्य सामने लाने के लिए अधिकारक्षम आयोग की माँग करते रहे श्री सुरेन्द्रनाथ चित्रांशी के साथ लम्बी चर्चा हुई. मैं इस संबंध में उनका सहयोगी हूँ. अगले कदमों पर चर्चा हुई. कायस्थ धर्म परिषद् की सक्रियता बढाकर इसे मानव मात्र के कल्याण हेतु गतिविधि का केंद्र बनाने पर विचार हुआ.                                                          
२. कायस्थ महासभा रामपुर कानपूर के नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री पंकज श्रीवास्तव के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में सहभागिता कर सामाजिक समस्याओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा १३ अप्रैल को व्यक्तिगत चर्चा में चित्रगुप्त व्याख्यानमाला के अंतर्गत राष्ट्रीय हित के विषयों पर प्रति वर्ष एक आयोजन करने के विचार पर सहमति हुई. मसिजीवी कायस्थ समाज के अस्त्र कलम का प्रतीक चिन्ह भूमंडल उठाये निब का सुन्दर प्रतीक चिन्ह मुझे भेंट किया गया.



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