स्तम्भ menu

Drop Down MenusCSS Drop Down MenuPure CSS Dropdown Menu

मंगलवार, 7 अप्रैल 2015

kavita: baans sanjiv

कविता 
बाँस
संजीव
.
ज़िन्दगी भर 
नेह-नाते 
रहे जिनसे.
रह गए हैं
छूट पीछे
आज घर में.
साथ आया वह
न जिसकी
कभी भायी फाँस.
उठाया
हाँफा न रोया
वीतरागी बाँस
*

कोई टिप्पणी नहीं: