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शनिवार, 18 अप्रैल 2015

navgeet: sanjiv

नवगीत: 
संजीव
.
मन की तराजू पर तोलो 
'जीवन मुश्किल है' 
यह सच है 
ढो मत, 
तनिक मजा लो.
भूलों को भूलो 
खुद या औरों को 
नहीं सजा दो. 
अमराई में हो 
बहार या पतझड़ 
कोयल कूके-
ऐ इंसानों!
बनो न छोटे 
बात में कुछ मिसरी घोलो 
.
'होता है वह 
जो होना है'' 
लेकिन 
कोशिश करना.
सोते सिंह के मुँह में 
मृग को 
कभी न पड़ता मरना. 
'बोया-काटो'  
मत पछताओ  
गिर-उठ कदम बढ़ाओ. 
ऐ मतिमानों!
करो न खोटे 
काम, न काँटे बो लो.  
.

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