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रविवार, 3 मई 2015

doha salila: sanjiv

दोहा सलिला,
अखबारी दोहे
संजीव
.
कॉफी नाकाफी हुई, माफी दो सरकार
ऊषा हाज़िर हो गयी, ले ताज़ा अखबार
.
चाय-पिलाऊँ प्रेम से, अपनेपन के साथ
प्रिय मांगे अखबार तो, लगे ठोंक लूँ माथ
.  
बैरन है अखबार यह, प्रिय को करता दूर
बैन लगा दूँ वश चले, मेरा अगर हुज़ूर
.
चाह चाय की अधिक या, रुचे अधिक अखबार
केर-बेर के संग सी, दोनों की दरकार
.
नज़र प्यार के प्यार पर, रखे प्यार से यार
नैन न मिलते नैन से, बाधक है अखबार
.  

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