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सोमवार, 25 मई 2015

doha

दोहा:

हवा आग धरती गगन, रोटी वस्त्र किताब
'सलिल' कलम जिसको मिले, वह हो मनुज जनाब
*
रिसते जख्मों की कथा रिश्ते हैं, पर मौन 
जुड़ें टूट फिर-फिर जुड़ें, क्यों बतलाये कौन??
*

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