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मंगलवार, 19 मई 2015

dwipadiyan: sanjiv

द्विपदियाँ
संजीव
*
चतुर्वेदी को मिला जब राह में कोई कबीर 
व्यर्थ तत्क्षण पंडितों की पंडिताई देख ली
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सुना रहा गीता पंडित जो खुद माया में फँसा हुआ 
लेकिन सारी दुनिया को नित मुक्ति-राह बतलाता है 
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आह न सुनता किसी दीन की बात दीन की खूब करे 
रोज टेरता खुदा न सुनता मुल्ला हुआ परेशां है
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