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शुक्रवार, 1 मई 2015

ghanakshari: kalpana mishra bajpeyi

घनाक्षरी: 

कल्पना मिश्रा बाजपेई सरस्वती 

धवल वस्त्र धारणी सुभाषिनी माँ शारदे     ८-८  
वीणा-पाणि वीणा कर धारती हैं प्रेम से      ८-७ 
मुख पे सुहास माँ का देखते ही बन रहा      ८-८ 
जग सारा विस्मित है प्यारी छवि देख के   ८-७ 
अहम का नाश करो बुद्धि में प्रकाश भरो     ८-८ 
मेरा मन साधना में नेह से लगाइए           ८-७
"कल्पना" के भावों को भाववान कीजिये    ७-७
खुशियों से भर जाए मन मेरा देख के॥      ८-७ 

1 टिप्पणी:

sanjiv ने कहा…

bahut barhiya