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शुक्रवार, 8 मई 2015

navgeet: sanjiv

नवगीत:
संजीव 
*
जो 'फुट' पर चलते 
पलते हैं 'पाथों' पर 
उनका ही हक है सारे 
'फुटपाथों' पर 
*
बेलाइसेंसी कारोंवालों शर्म करो 
मदहोशी में जब कोई दुष्कर्म करो 
माफी मांगों, सजा भोग लो आगे आ 
जिनको कुचला उन्हें पाल कुछ धर्म करो 
धन-दौलत पर बहुत अधिक इतराओ मत 
बहुत अधिक मोटा मत अपना चर्म करो 
दिन भर मेहनत कर 
जो थककर सोते हैं 
पड़ते छाले उनके 
हाथों-पांवों पर 
जो 'फुट' पर चलते 
पलते हैं 'पाथों' पर 
उनका ही हक है सारे 
'फुटपाथों' पर 
*
महलों के अंदर रहकर तुम ऐश करो 
किसने दिया तुम्हें हक़ ड्राइविंग रैश करो 
येन-केन बचने के लिये वकील लगा 
झूठे लाओ गवाह खर्च नित कैश करो 
चुल्लू भर पानी में जाकर डूब मारो 
सत्य-असत्य कोर्ट में मत तुम मैश करो 
न्यायालय में न्याय 
तनिक हो जाने दो 
जनगण क्यों चुप्पी 
साधे ज़ज़्बातों पर 
जो 'फुट' पर चलते 
पलते हैं 'पाथों' पर 
उनका ही हक है सारे 
'फुटपाथों' पर 
*
स्वार्थ सध रहे जिनके वे ही संग जुटे 
उनकी सोचो जिनके जीवन-ख्वाब लुटे 
जो बेवक़्त बोलते कड़वे बोल यहाँ 
जनता को मिल जाएँ अगर बेभाव कुटें 
कहे शरीयत जान, जान के बदले दो 
दम है मंज़ूर करो, मसला सुलटे 
हो मासूम अगर तो 
माँगो दण्ड स्वयं 
लज्जित होना सीखो 
हुए गुनाहों पर 
जो 'फुट' पर चलते 
पलते हैं 'पाथों' पर 
उनका ही हक है सारे 
'फुटपाथों' पर 

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