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बुधवार, 24 जून 2015

muktika: sanjiv

एक प्रयोग- 
मुक्तक मुक्तिका :
संजीव
*
न हास है, न रास है 
अनंत प्यास-त्रास है
जड़ें न हैं जमीन में 
गगन में न उजास है

लक्ष्य क्यों उदास है?
थका-चुका प्रयास है.
कशिश न कोशिशें रुकें  
हुलास ही हुलास है

न आम है, न ख़ास है
भविष्य तो कयास है 
मालियों से पूछिए 
सुवास तो सुवास है 

***

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