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मंगलवार, 7 जुलाई 2015

गीत

गीत बरबस
गुनगुना दो तुम
*
चहचहाती मुखर गौरैया
जागरण-संदेश दे जाए
खटखटाकर द्वार की कुण्डी
पवन-झोंका घर में घुस आए
पलट दे घूँघट, उठें नैना
मिलें नैनों से सँकुच जाएँ
अचंभित दो तन पुलक सिहरें
मन तरंगित जयति जय गाएँ
तनिक कंगन
खनखना दो तुम
गीत बरबस
गुनगुना दो तुम
*
चाय की है चाह, ले आओ
दे रहीं तो तनिक चख जाओ
स्वाद ऐसा फिर कहाँ पाऊँ
दिखा ठेंगा यूँ न तरसाओ
प्रीत सरिता के किनारे पर
यह पपीहा पी कहाँ टेरे
प्यास रहने दो नहीं बाकी
चाह ही बन बाँह है घेरे
प्राण व्याकुल
झनझना दो तुम
गीत बरबस
गुनगुना दो तुम
*
कपोलों पर लाज सिन्दूरी
नयन-पट पलकें हुईं प्रहरी
लरजते लब अनकही कहते
केश लट बिखरी ध्वजा फहरी
चहक बहकी श्वास हो सुरभित
फागुनी सावन हुआ पुरनम
बरसती बूँदें करें नर्तन
धड़कते दिल या बजी सरगम
तीर चितवन के
चला दो तुम
झनझना दो तुम
गीत बरबस
गुनगुना दो तुम
*

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