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शनिवार, 25 जुलाई 2015

muktak

मुक्तक: संजीव * मापनी: २११ २११ २११ २२ *
आँख मिलाकर आँख झुकाते आँख झुकाकर आँख उठाते आँख मारकर घायल करते आँख दिखाकर मौन कराते *


मापनी: १ २ २ १ २ २ १ २ २ १२२
*
न जाओ, न जाओ जरा पास आओ
न बातें बनाओ, न आँखें चुराओ
बहुत हो गया है, न तरसा, न तरसो
कहानी सुनो या कहानी सुनाओ
*



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