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शुक्रवार, 17 जुलाई 2015

muktika:

मुक्तिका
संजीव
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मापनी: १२२ १२२ १२२ १२२
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हमारा-तुम्हारा हसीं है फ़साना
न आना-जाना, बनाना बहाना

न लेना, न देना, चबाना चबेना
ख़ुशी बाँट, पाना, गले से लगाना

मिटाना अँधेरा, उगाना सवेरा
पसीना बहाना, ग़ज़ल गुनगुनाना

न सोना, न खोना, न छिपना, न रोना
नये ख्वाब बोना, नये गीत गाना

तुम्हीं को लुभाना, तुम्हीं में समाना
तुम्हीं आरती हो, तुम्हीं हो तराना

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