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शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

muktika :

मुक्तिका:
संजीव
*
कैसा लगता काल बताओ
तनिक मौत को गैर लगाओ

मारा है बहुतों को तड़पा
तड़प-तड़पकर मारे जाओ

सलमानों के अरमानों की
चिता आप ही आप जलाओ

समय न माफ़ करेगा तुमको
काम देश के अगर न आओ

छोड़ शस्त्र यदि कलम थाम लो
संभव है कलाम बन जाओ

***

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