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शुक्रवार, 18 सितंबर 2015

alankar charcha : vainsagai alankar

:अलंकार चर्चा  ०८ : 

वैणसगाई अलंकार   
जब-जब अंतिम शब्द में, प्रथमाक्षर हो मीत 
वैणसगाई जानिए, काव्य शास्त्र की रीत 
जब काव्य पंक्ति का पहला अक्षर अंतिम शब्द में कहीं भी उपस्थित हो  वैणसगाई अलंकार होता है. 
उदाहरण:
१. माता भूमि मान 
   पूजै राण प्रतापसी 
   पहली पंक्ति में 'म' तथा दूसरी पंक्ति में  प' की आवृत्ति दृष्टव्य है, 
२. हरि!  तुम बिन निस्सार है, 
    दुनिया दाहक दीन
   दया करो दीदार दो, 
   मीरा जल बिन मीन.  - संजीव 
३. हम तेरे साये की खातिर धूप में जलते रहे 
    हम खड़े राहों में अपने हाथ ही मलते रहे   -देवकीनन्दन 'शांत'
४. नीरव प्रशांति का मौन बना बना - जयशंकर प्रसाद 
५. सब सुर हों सजीव साकार … 
   .... तान-तान का हो विस्तार   -मैथिली शरण गुप्त 
६. पर अनश्वर था सकल पल्लवित पल  -निराला 
७. हमने देखा सदन बने हैं
    लोगों का अपनापन लेकर    - बालकृष्ण शर्मा नवीन 
८. जो हृदय की बात है वह आँख से जब बरस जाए  - डॉ. रामकुमार वर्मा 
९. चौकस खेतिहरों ने पाये ऋद्धि-सिद्धि के आकुल चुंबन   -नागार्जुन 
१०.  तब इसी गतिशील  सिंधु-यात्री हेतु    -सुमित्रा कुमारी सिन्हा 
गणेश चतुर्थी / विश्वकर्मा जयंती
१७-९--२०१५
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