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गुरुवार, 8 अक्तूबर 2015

geet: niraj

विरासत:
गीत:
मेरा गीत दिया बन जाए -
गोपालदास नीरज
*










*
अँधियारा जिससे शरमाये,
उजियारा जिसको ललचाये,
ऎसा दे दो दर्द मुझे तुम
मेरा गीत दिया बन जाये!
*
इतने छलको अश्रु, थके हर 
राहगीर के चरण धो सकूँ।
इतना निर्धन करो, कि हर 
दरवाज़े पर सर्वस्व खो सकूँ।
ऎसी पीर भरो प्राणों में, नींद 
न आये जनम-जनम तक,
इतनी सुध-बुध हरो कि 
साँवरिया खुद बाँसुरिया बन जायें!
ऎसा दे दो दर्द मुझे तुम
मेरा गीत दिया बन जाये!!
*
घटे न जब अँधियार, करे
तब जलकर मेरी चिता उजेला।
पहला शव मेरा हो, जब
निकले मिटनेवालों का मेला।
पहले मेरा कफ़न पताका
बन फहरे जब क्रान्ति पुकारे।
पहले मेरा प्यार उठे जब
असमय मृत्यु प्रिया बन जाये!
ऎसा दे दो दर्द मुझे तुम
मेरा गीत दिया बन जाये!!
*
मुरझा पाये फसल न कोई
ऎसी खाद बने इस तन की
किसी न घर दीपक बुझ पाये
ऎसी जलन जले इस मन की
भूखी सोये रात न कोई,
प्यासी जागे सुबह न कोई
स्वर बरसे सावन आ जाये
रक्त गिरे, गेहूँ उग आये!
ऎसा दे दो दर्द मुझे तुम
मेरा गीत दिया बन जाये!!
*
बहे पसीना जहाँ-वहाँ
हरयाने लगे नई हरियाली
गीत जहाँ गा आय, वहाँ
छा जाय सूरज की उजियाली
हँस दे मेरा प्यार जहाँ
मुसका दे मेरी मानव-ममता
चन्दन हर मिट्टी हो जाय
नन्दन हर बगिया बन जाये।
ऎसा दे दो दर्द मुझे तुम
मेरा गीत दिया बन जाये!!
*
उनकी लाठी बने लेखनी
जो डगमगा रहे राहों पर
हृदय बने उनका सिंहासन
देश उठाये जो बाहों पर
श्रम के कारण चूम आई
वह धूल करे मस्तक का टीका
काव्य बने वह कर्म, कल्पना-
से जो पूर्व क्रिया बन जाये!
ऎसा दे दो दर्द मुझे तुम
मेरा गीत दिया बन जाये!!
*
मुझे श्राप लग जाये, न दौङूं
जो असहाय पुकारों पर मैं
आँखें  ही बुझ जायें, बेबेसी
देखूँ अगर बहारों पर मैं
टूटें मेरे हांथ न यदि यह
उठा सकें गिरने वालों को
मेरा गाना पाप अगर
मेरे होते मानव मर जाय!
ऎसा दे दो दर्द मुझे तुम
मेरा गीत दिया बन जाये!!

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1 टिप्पणी:

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