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गुरुवार, 22 अक्तूबर 2015

laghukatha

लघुकथा:
अट्टहास
*
= 'वाह, रावण क्या खूब जल रहा है?'

- 'तो इसमें ख़ुशी की क्या बात है?'

= ख़ुशी की बात तो है ही. जैसा करा वैसा भर। पाप का फल ऐसा ही होता है.

__ झूठ, बिलकुल झूठ. रावण के पुतले में से आवाज़ आई.

= झूठ क्यों? यही तो सच है.

__ 'यदि यह सच होता तो आज मैं नहीं, इस देश के नेता, अफसर और व्यापारी मुझसे पहले जलते, तुम सब भी आंच में झुलसते और मैं कर रहा होता अट्टहास'

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