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मंगलवार, 17 नवंबर 2015

country and minority communitie- putin

देश और अल्पसंख्यक: 

अल्पसंख्यकों को सीख : 


रूस के राष्ट्रपति श्री व्लादिमिर पुतिन ने गत ४ अगस्त २०१५ को डूमा (रुसी संसद) को संबोधित कर रूस निवासी मुस्लिम अल्पसंख्यकों के संबंध में संक्षिप्त नीतिगत वक्तव्य दिया। भारतीय संसद में प्रधानमंत्री ऐसा वक्तव्य दें तो क्या होगा? पढ़िए श्री पुतिन का वक्तव्य, क्या भारत के साम्यवादी इसका समर्थन करेंगे? अगर नहीं तो क्यों? धर्म निरपेक्षता की समर्थक कांग्रेस, समाजवादी और दलित राजनीति कर रहे नेता इस नीति को स्वीकार लें तो देश का भला हो.


रूस में, रूसियों की तरह रहें, कहीं से भी आया हों , यदि वह रूस में रहना चाहता है. रूस में काम करना और खाना चाहता है तो उसे रूसी बोलना और रूसी कानूनों का सम्मान करना ही पड़ेगा। यदि वे शरीआ कानून को प्राथमिकता देते हैं और मुसलमानों की ज़िन्दगी जीते हैं तो हम उन्हें उन स्थानों पर जाने की सलाह देते हैं जहाँ वह राज्य का कानून है. रूस मुस्लिम अल्पसंख्यकों की जरूरत नहीं है. अल्पसंख्यकों को रूस की जरूरत है, और हम उन्हें विशेष सुविधाएँ नहीं देंगे, अथवा अपने कानूनों को उनकी इच्छापूर्ति के लिये नहीं बदलेंगे, वे कितनी भी जोर से भेदभाव चिल्लाएँ कोई फर्क नहीं पड़ता। हम अपनी रूसी सभ्यता का असम्मान सहन नहीं करेंगे. यदि हमें एक देश की तरह ज़िंदा रहना है तो बेहतर है कि हम अमेरिका, इंग्लॅण्ड, हॉलैंड और फ़्रांस से सबल लें. मुस्लिम उन देशों को हड़प रहे हैं और वे रूस को नहीं हड़प सकते। शरीआ कानूनों और मुसलमानों के शुरुआती तौर-तरीकों और हीन संस्कृति से रुसी रीति-रिवाज़ों और परम्पराओं की तुलना नहीं की जा सकती। 
यह माननीय विधायिका जब नए कानून बनाने का विचार करे तो इसे यह देखते हुए कि मुस्लिम अल्पसंख्यक रूसी नहीं हैं, सर्वप्रथम रूसी राष्ट्र के हित का ध्यान रखना होगा। 



डूमा के सदस्यों ने ५ मिनिट तक खड़े होकर करतल धवनि करते हुए श्री पुतिन का अभिनंदन किया। 



क्या भारत के सांसद इस प्रसंग से कुछ सीख लेंगे??

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Vladimir Putin's speech - SHORTEST SPEECH EVER
On August 04, 2015, Vladimir Putin, the Russian president, addressed the Duma, (Russian Parliament), and gave a speech about the tensions with minorities in Russia:
In Russia, live like Russians. Any minority, from anywhere, if it wants to live in Russia, to work and eat in Russia, it should speak Russian, and should respect the Russian laws. If they prefer Sharia Law, and live the life of Muslim's then we advise them to go to those places where that's the state law.
Russia does not need Muslim minorities. Minorities need Russia, and we will not grant them special privileges, or try to change our laws to fit their desires, no matter how loud they yell 'discrimination'. We will not tolerate disrespect of our Russian culture. We better learn from the suicides of America, England, Holland and France, if we are to survive as a nation. The Muslims are taking over those countries and they will not take over Russia. The Russian customs and traditions are not compatible with the lack of culture or the primitive ways of Sharia Law and Muslims.
When this honorable legislative body thinks of creating new laws, it should have in mind the Russian national interest first, observing that the Muslims Minorities Are Not Russians. The politicians in the Duma gave Putin a five minute standing ovation.

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