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रविवार, 6 दिसंबर 2015

चन्द माहिया : क़िस्त 23

चन्द माहिया : क़िस्त 23
:1:
रिश्तों की तिजारत में
ढूँढ रहे हो क्या
नौ फ़स्ल-ए-रवायत में

:2:

कुछ ख़ास नहीं बदला
छोड़ गई जब से
अब तक हूँ नहीं सँभला

:3:
ये ख़ून बहा किसका
मैं क्या जानू रे !
कुर्सी से रहा चिपका

:4:
अच्छा न बुरा जाना
दिल ने कहा जो भी
बस वो ही सही माना

:5:
वो आग लगाते है
अपना भी ईमां
हम आग बुझाते हैं

-आनन्द.पाठक-
09413395592

1 टिप्पणी:

sanjiv verma ने कहा…

बहुत बढ़िया, बधाई। कृपया, फेस बुक पर अलंकार सलिला में अलंकारों पर लेख देखें। अलंकारों के उदाहरण में माहिए जोड़ना चाहता हूँ. लिखकर भेज सकेंगे क्या?