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शनिवार, 2 जनवरी 2016

ek rachna

एक रचना-
नया साल है
*
न तुम बदले, न हम बदले
घुसो-मारें, करें हल्ला
गलत हो तुम
सही हैं हम
पुरानी चाल है
नया साल है
*
इधर टोली, उधर टोली
लपक-झपटें, उठा पटकें
इधर गोली
उधर गोली
अरि को काल है
नया साल है
*
इधर बातें, उधर बातें
फ़तह को शह न दें मातें
करो घातें 
मिलें लातें
बासी उबाल है
नया साल है
*
बहस जारी, है अय्यारी
बबूलों से भरी क्यारी
न ये उसका
न वो इसका
सियासी लाल है
नया साल है
*

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