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सोमवार, 11 जनवरी 2016

navgeet

नवगीत-
गुनो भी
*
जो पढ़ो
उसकी समझकर
गुनो भी 

*
सिर्फ रट लेना विषय
काफी नहीं है
जानकार ना जानना?
माफ़ी नहीं है
किताबों को
खोलकर, सर
धुनों भी
जो पढ़ो
उसकी समझकर
गुनो भी 

*
बात अपनी बोलना
बेहद जरूरी
जानकारी लें न दें
आधी-अधूरी
कोशिशों की
ऊन ले, चादर
बुनो भी
जो पढ़ो
उसकी समझकर
गुनो भी 

*
जीभ पायी एक
लेकिन कान दो हैं
गीत अपने नहीं
किसको कहो मोहें?
अन्य क्या कहते
कभी उसको
सुनो भी
जो पढ़ो
उसकी समझकर
गुनो भी 

***

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