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बुधवार, 17 फ़रवरी 2016

नवगीत

एक रचना- 
आदमी 
*
हमने जहाँ 
जब भी लिखा 
बस आदमी लिखा 
*
मेहनत लिखी 
कोशिश लिखी 
मुस्कान भी लिखी 
ठोकर लिखी
आहें लिखीं 
नव तान भी लिखी 
पीड़ा लिखी 
आँसू लिखे 
पहचान भी लिखी 
ऐसा नहीं कि 
कुछ न कहीं 
वायवी लिखा 
*
कुछ चाहतें 
कुछ राहतें
मधुगान भी लिखा 
पनघट लिखा 
नुक्कड़ लिखा 
खलिहान भी लिखा 
हुक्का लिखा 
हाकिम लिखा 
फरमान भी लिखा 
पत्थर लिखा 
ठोकर लिखी 
मधुगान भी लिखा 
*
गेंती लिखी 
छाले लिखे 
प्याले नहीं लिखे
उपले लिखे 
टिक्कड़ लिखे 
निवाले भी लिखे 
अपने लिखे 
सपने लिखे 
यश-मान भी लिखा 
अमुआ लिखा 
महुआ लिखा 
बेचारगी लिखा 
*

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