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रविवार, 7 फ़रवरी 2016

muktika

मुक्तिका:
*
जीना अपनी मर्जी से
मगर नहीं खुदगर्जी से
*
गला काटना, ठान लिया?
कला सीख लो दर्जी से
*
दुश्मन से कम खतरा है
अधिक दोस्ती फर्जी से
*
और सभी कुछ पा लोगे
प्यार न मिलता अर्जी से
*
'सलिल' जरा तो सब्र करो
दूर रहो सुख कर्जी से

1 टिप्पणी:

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " एक थी चिरैया " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !