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बुधवार, 16 मार्च 2016

मुक्तिका

मुक्तिका :
मापनी- २१२२ २१२२ २१२
*
तू न देगा, तो न क्या देगा खुदा?
है भरोसा न्याय ही देगा खुदा।
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एक ही है अब गुज़ारिश वक़्त से
एक-दूजे से न बिछुड़ें हम खुदा।
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मुल्क की लुटिया लुटा दें लूटकर
चाहिए ऐसे न नेता ऐ खुदा!
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तब तिरंगे के लिये हँस मर मिटे
हाय! भारत माँ न भाती अब खुदा।
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नौजवां चाहें न टोंके बाप-माँ
जोश में खो होश, रोएँगे खुदा।
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औरतों को समझ-ताकत कर अता
मर्द की रहबर बनें औरत खुदा।
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लौ दिए की काँपती चाहे रहे
आँधियों से बुझ न जाए ऐ खुदा!
***
(टीप- 'हम वफ़ा करके भी तन्हा रह गए' गीत इसी मापनी पर है.)


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