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सोमवार, 14 मार्च 2016

haiku

हाइकू कैसे लिखें
- एस० डी० तिवारी
हाइकू एक जापानी काव्य विधा है, जिसका प्रचलन १६ वीं शताब्दी में प्रारम्भ हो गया था. एक जापानी कवि बाशो को हाइकू का जनक माना जाता है. हाइकू मात्र सत्रह मात्राओं में लिखी जाने वाली कविता है और अब तक की सबसे सूक्ष्म काव्य है और साथ ही सारगर्भित भी. हाइकू की लोकप्रियता व सारगर्भिता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज दुनिया कि हर भाषा में हाइकू लिखे जा रहे हैं. कुछ हिंदी विद्वान हाइकू काव्य को विदेशी बताकर आलोचना भी करते हैं पर साहित्य को किसी भाषा, क्षेत्र या तकनीक की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता. बल्कि मैं तो यह कहूँगा की जिस प्रकार मारुति कार, जापानी होकर भी छोटी होने के कारण हमारे यहाँ आम आदमी तक पहुँच बना ली उसी प्रकार हाइकू भी आम आदमी तक बड़ी सरलता से पहुँच सकता है. क्योंकि इसमे आम और साधारण बातों को ही जो प्रकृति और हमारे जीवन से जुडी होती हैं, सुन्दर और विशेष विधि से कम से कम यानी सत्रह अक्षरों में कह दिया जाता है. यह विधि उन कवियों के लिए वरदान है जो अच्छे भाव, ज्ञान व विचार तो रखते हैं पर छंद बंध करने की क्षमता कम होने के कारण अपनी कविता लिख ही नहीं पाते.
हिंदी हाइकू मात्र १७ वर्णों में लिखे जाते हैं. ऐसा लगता है कि हाइकू लिखना अति सरल है पर लिखने बैठे तो लगता है कितना कठिन भी है. कई बार तो ५ मिनट से भी कम समय में हाइकू बन जाता है और कई बार एक हाइकू लिखने में घंटों लग जाते हैं. इसका कारण है इसकी लिखने कि कला और इसका सारगर्भित होना. एक नन्हा सा हाइकू बहुत बड़ी बात कहने का सामर्थ्य रखता है और साधारण बात को भी ऐसे असाधारण तरीके से कह देता है जिसे पढ़कर पाठक रोमांचित हो जाता है तथा एक पृथक आनंद का अनुभव करता है.
हाइकू में मात्र १७ अक्षरों में जो तीन पंक्तियों में विभाजित होते हैं, अपने विचार प्रकट करने होते हैं या किसी दृश्य विशेष को दर्शाना होता है और इतने कम अक्षरों में बिम्ब प्रस्तुति के साथ रचना को रुचिकर भी रखना होता है जो एक कठिन कार्य है. क्योंकि इसमे कवि अपनी पूरी बात विस्तृत रूप से नहीं कह पाता. हाइकू लिखना गहरी सोच, अध्ययन व अभ्यास का परिणाम होता है. हाइकू लिखने वाला कोई भी अपने को पूर्ण रूप से पारंगत नहीं कह सकता.
अपनी कला के कारण हाइकू एक अपूर्ण कविता होते हुए भी पूरा भाव देने में सक्षम होता है. हाइकू ऐसी चतुराई से कहा जाता है कि पाठक अथवा श्रोता अपने ज्ञान व विवेक का प्रयोग करते हुए उसके भाव या उद्देश्य को पूर्ण कर लेता है. चूकि पाठक हाइकू को पढने के लिए उसमे पूर्ण रूप से घुसना पड़ता है, वह उसे अपने से जुड़ा व आनंदित अनुभव करता है.
हाइकू लिखने की विधि
अंग्रेजी हाइकू में १७ सिलेबल यानी मात्राएँ या स्वर की इकाई होती हैं परन्तु हिंदी में अभी तक १७ वर्णों में ही हकु लिखे जा रहे हैं. वर्णों की गणना करके लिखने में कुछ अक्षर कम अवश्य मिलते हैं पर लिखने में अति सरलता का अनुभव होता है और यदि कम अक्षरों में काम चल जाता है तो अधिक की आवश्यकता ही क्यों.
हाइकू में किन्ही दो भाव, विचार, बिम्ब या परिदृश्य को मात्र १७ वर्णों में तीन पंक्तियों में दो या अधिक वाक्यांशों में इस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है ताकि प्रथम व अंतिम पंक्ति में ५-५ वर्ण व दूसरी पंक्ति में ७ वर्ण हों. दोनों भावों, विचारों या दृश्यों को तुलनात्मक रूप से इस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है की वे पृथक पृथक होते हुए भी परस्पर सम्बंधित हों. हाइकू की तीन पंक्तियाँ भावात्मक दृष्टि से दो खण्डों में विभाजित होती है. एक साधारण खंड तथा दूसरा विशेष खंड. साधारण खंड में विषय वस्तु की आधारभूत भाव, बिम्ब, दृश्य या विचार रखी जाती है तथा विशेष खंड में उससे सम्बंधित विस्मित करने वाला विशेष तत्व. दोनों खंड पृथक होते हुए भी परस्पर पूरक होते हैं. दोनों खंड व्याकरण की दृष्टि से स्वतंत्र होने चाहिए. अपनी कविता १७ वर्णों में तीन पंक्तियों में लिख देने से हाइकू नहीं बन जाता बल्कि अच्छे हाइकू की विशेषता है उसमे पाठक को चौकाने वाला तत्व. यहाँ यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी की हाइकू में साधारण बात को ही असाधारण तरीके से कही जाती है. हाइकू एक वाक्य का नहीं होता. हाइकू में लय, विराम, पूर्ण विराम आदि चिन्हों की आवश्यकता नहीं होती. हाइकू मूलतः प्रकृति विषयों पर लिखे जाते हैं पर आजकल जीवन संबधी विषयों पर भी हाइकू बढ़ चढ़ कर लिखे जा रहे हैं. जीवन व ईश्वरीय विषयों पर लिखे हाइकू को अंग्रेजी में सेनर्यू कहा जाता है. वैसे हाइकू और सेनर्यू में विषय के अतिरिक्त और कोई अंतर नहीं है.
तीन पंक्तियों में से दो विषय वस्तु एवं उसके आधारभूत भाव या व्यवहार को दर्शाता है तथा तीसरी विशेष पंक्ति जिसमे उससे सम्बंधित विस्मयकारी भाव होता है. उदहारण के लिए मेरे निम्न हाइकू को पढ़ें -
दाना लेकर
चुहिया हाथ जोड़े
बिल्ली घात में
उपरोक्त हाइकू में 'दाना लेकर चुहिया हाथ जोड़े ' एक बिम्ब प्रस्तुत कर रही है यानी चुहिया हाथों में दाना लेकर खा रही है किन्तु उससे पृथक यहाँ पर एक और बिम्ब है 'बिल्ली घात में' यानी की बिल्ली भी भोजन की जुगत में है और वह भोजन के रूप में चुहिया को देख रही है. दूसरा बिम्ब पहले पर निर्भर है अगर वहां चुहिया नहीं होती तो बिल्ली भी घात में ना होती.
बाशो का एक हाइकू है
old pond
a frog leaps in
sound of water
यहाँ दो दृश्य हैं एक पुराना ताल जिसमे मेढक कूदा, दूसरा पानी कि ध्वनि जिससे ज्ञात हुआ कि मेढक कूदा. इस हाइकू में बाशो ने यह कह कर चौंका दिया कि मेढक जल की ध्वनि में कूदा. इसे पाठक सरलता से समझ सकता है कि मेढक कूदा तो जल में ही पर उसके कूदने का परिणाम, जल में ध्वनि उत्पन्न हुई जिससे मेढक के कूदने का बोध हुआ. बीच कि बात यानी कि वह जल में कूदा पाठक अपने विवेक से समझ लेता है.
इसका हिंदी रूपांतर मैंने इस प्रकार किया है -
पुराना ताल
जल करतल में
कूदा मेढक
मेरे इस हाइकू को देखें मैंने इसमे रूपक अलंकार का प्रयोग किया है यानी कि प्राण ताल में मेढक कूदा और जल ताली बजा रहा है अर्थ वही है जल कि ध्वनि.
हाइकू के तीन मूल तत्व
१. ५-७-५ वर्णों के क्रम में व्यवस्थित तीन पंक्तियों कि कविता
२. दो भाव, विचार, बिम्ब, दृश्य आदि कि तुलनात्मक प्रस्तुति
३. विस्मयकारी बोध अथवा चौंकाने वाला तत्त्व
हाइकू लिखने के क्रम
१. भाव या विचारों की सोच व आत्म-मंथन
२. उचित शब्दों का चुनाव
३. उन शब्दों को ५-७-५ वर्णों के क्रम में हाइकू की तकनीक के अनुसार व्यवस्थित करना
हाइकू लिखने की और बारीकियां आगे के लेख व टिप के द्वारा दी जाती रहेंगी

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